संघ शताब्दी वर्ष पर सेक्टर 14 सामुदायिक भवन में हुई प्रमुख जन गोष्ठी
Bilkul Sateek News
गुरुग्राम, 11 जनवरी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ( आरएसएस) शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के अंतर्गत प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें गुरुग्राम भाग के समाज मे अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लगभग तीन सौ लोगों ने भाग लिया। गोष्ठी में पूर्व आई पी एस अधिकारी रंजीव सिंह दलाल मुख्य अतिथि के रूप में व महानगर संघ चालक जगदीश ग्रोवर विशेष तौर पर उपस्तिथ रहे।
सेक्टर 14 के सामुदायिक भवन में आयोजित होने वाली इस गोष्ठी के मुख्य वक्ता स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय संगठक कश्मीरी लाल ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पांच बच्चों से शुरू किया संगठन आज दुनिया के सबसे बड़े संगठन के रूप में कार्य कर रहा है। उन्होंने आरएसएस संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पारिवारिक अभाव व विपरीत परिस्थिति होने बाद भी उन्होंने देश के लिए कार्य करने का संकल्प लिया औऱ आज दुनिया के सामने संघ का स्वरूप दिखाई दे रहा है। कश्मीरी लाल के अनुसार कोई भी समाजिक कार्य करते समय निराशा का भाव नहीं होना चाहिए। अगर राष्ट्र व समाज हित कार्य करते समय निराशा होती है तो डॉ हेडगेवार व संघ का इतिहास पढ़ ले, निराशा का भाव स्वतः ही समाप्त हो जाएगा। कार्य बेशक छोटा हो लेकिन इरादा बड़ा होना चाहिए। उन्होंने भारतीय मजदूर संघ व किसान संघ जैसे संगठनो का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने यह नहीं कहा कि दुनिया के मजदूरों एक जाओ, बल्कि उन्होंने कहा कि दुनिया के मजदूरों दुनिया को एक कर लो। उन्होंने कहा की हर आपदा में संघ अग्रिम पंक्ति में खड़ा रहता है। उनके अनुसार संघ पर अन्य समुदाय से नफरत करने का आरोप कुछ विरोधी लगाते हैं, जबकि वास्तविकता यह कि संघ केवल हिंदुत्व की सनातन परम्पराओं का गौरव करता है किसी से नफरत नहीं। कोरोना काल इसका उदाहरण है। आपदा में संघ किसी का धर्म नहीं देखता बल्कि मानवता के धर्म का पालन करता है। संघ भारतीय सनातन परम्पराओं की अनुपालना में विश्वास रखता है। उन्होंने उपस्तिथ जन समूह का आह्वान करते हुए कहा कि आपके पास कोई समाज हित का आइडिया है तो संघ को बताएं, संघ आपको उस कार्य हेतु टीम देगा और आपके पास टीम है तो संघ आपको समाज हित का आइडिया देगा। मिलकर कार्य करने से गुणात्मक परिणाम निकलते हैं। उन्होंने लोगों से संघ कार्य में सहयोग करने का आह्वान करते हुए कहा एक घण्टा राष्ट्र हित के लिए अवश्य लगाएं।
उन्होंने संघ और समाज एक दूसरे में सम्माहित होने आह्वान किया।
राष्ट्र सेविका समिति की सह प्रान्त कार्यवाहिका प्रतिमा मनचन्दा ने पंच परिवर्तन पर चर्चा करते हुए कहा कि संघ समाज के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व जीवन शैली युगानुकूल परिवर्तन के साथ चलती है। आज परिवार को बचाने की आवश्यकता है। टूटते परिवार देश की समस्या बनती जा रही है। मैं के बोध को छोड़कर हम का बोध जागृत करना होगा। हमारा परिवार आदर्श हिन्दू परिवार बने। बच्चों को संस्कारित करना होगा। उन्हें अतिथि सत्कार, पड़ोसी से संबंध और समाज के प्रति दायित्व का बोध कराना होगा। उनके अनुसार पाश्चात्य परम्परा के आलोक में परिवार स्वछंद होते जा रहे। लिव इन रिलेशन की सनातन विरोधी परम्परा बढ़ रही है। मनचन्दा के अनुसार समाज में अनेक समस्या है, उन्हें हम सब मिलकर दूर करेंगे। आज की गोष्ठी का मूल हेतु भी यही है। पर्यावरण संरक्षण करना होगा। प्रकृति को भारत में मां का दर्जा दिया है। उसका दोहन नही बल्कि संरक्षण करना होगा।पृय्वी , वायु, आकाश, जल, अग्नि का संतुलन बनाना होगा। समाज से जातीय भेद को मिटाना होगा। उनके अनुसार समरस समाज के बिना भारत विकसित राष्ट्र नहीं बन सकता। नागरिक कर्तव्य की पालना हम सब को मिलकर करनी होगी।
गोष्ठी के मुख्यातिथि सेवानिवृत्त डी जी पी रंजीव सिंह दलाल ने कहा कि यह एक सराहनीय पहल है। उन्होंने संघ के सौ वर्ष की गाथा की भी सराहना करते हुए कहा कि संघ के कार्य अनुकरणीय है। पंच परिवर्तन आज भारत ही नहीं बल्कि विश्व की आवश्यकता है। सर्व समाज को इस गंभीर विषय पर कार्य करने की जरूरत है। विश्व गुरु बनना है तो समाज में समरूपता लानी होगी। अपने अधिकारों के साथ कर्तव्य की पालना भी करनी होगी। उन्होंने गांव की जीवन शैली की चर्चा करते हुए कहा कि गांव में ही भारत की आत्मा रहती है। पूर्व आई पी एस दलाल ने अपने माध्यम से चलने वाले पौधरोपण, लाइब्रेरी संचालन, प्लस्टिक प्रयोग पर रोक, जल संरक्षण, कूड़ा प्रबन्धन जैसे सामाजिक कार्यों को सांझा किया। उन्होंने गंदगी व प्लास्टिक प्रयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सब मिलकर कार्य करेंगे तो इसका भी समाधान हो जाएगा। सह संचालक चिदाम्बर ने आए सभी प्रमख जनों व अतिथियों का धन्यवाद किया, जबकि मंच संचालन प्रचार प्रमुख हरीश शर्मा ने किया।
आरएसएस के महानगर संघ चालक जगदीश ग्रोवर ने जानकारी देते हुए बताया कि आरएसएस गठन के सौ वर्ष पूरे हो रहे हैं। जिसे संघ शताब्दी वर्ष के रूप में मना रहा है। शताब्दीवर्ष में सात आयोजन किए जाने है। विजय दशमी उत्सव, नवम्बर दिसम्बर में सघन गृह संपर्क अभियान के बाद यह प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया है। उनके अनुसार गोष्ठी के लिए गुरुग्राम महानगर को दो भागों में बांटा गया है। गुरुग्राम भाग में होने वाली यह पहली गोष्ठी है। जबकि ऐसी दूसरी गोष्ठी नवीन भाग में आयोजित की जाएगी। इसके अलावा गुरुग्राम विश्विद्यालय के साथ ही अन्य शिक्षण संस्थानों में आरएसएस सर संघचालक द्वारा सुझाए गए पंच परिवर्तन जिनमे पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य, कुटुंब प्रबोधन व स्व का बोध स्वदेशी जीवन शैली शामिल है पर गोष्ठियां आयोजित की जाएंगी।



