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गुरुग्राम, 17 नवंबर। राष्ट्रीय मिर्गी दिवस 2025 के मौके पर आर्टेमिस हॉस्पिटल्स ने गुरुग्राम में एनजीओ सत्वम और उसे संबद्ध क्रेस्ट के साथ मिलकर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इसका उद्देश्य मिर्गी के बारे में जागरूकता बढ़ाना था। इस कार्यक्रम में लोगों को इस बीमारी के बारे में जागरूक करने और इससे जुड़े मिथकों को तोड़ने पर फोकस किया गया। इसके साथ ही लोगों को सही इलाज लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन 17 नवंबर को आर्टेमिस हॉस्पिटल्स में किया गया। सुबह 11 बजे मीडिया के लोगों से बातचीत हुई और 12 से 2 बजे तक हॉस्पिटल के ऑडिटोरियम में जागरूकता के लिए विशेष सत्र आयोजित किया गया।
आमजन अभी भी मिर्गी के बारे में बहुत कम जानते हैं। यह ऐसी न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसके बारे में सबसे ज्यादा भ्रम एवं छुआछूत की स्थिति बनी हुई है। इस प्रोग्राम में शीर्ष न्यूरोलॉजिस्ट और न्यूरोसर्जन एक मंच पर आए और इसके शुरुआती लक्षणों एवं इलाज के विकल्पों पर बात की। साथ ही बताया कि लोगों का एक-दूसरे को अपनाना इस दिशा में कितना महत्वपूर्ण है।
डॉ. सुमित सिंह, डॉ. आदित्य गुप्ता, डॉ. विवेक बरुन, डॉ. मोहित आनंद और डॉ. समीर अरोड़ा ने इस संबंध में लोगों को संबोधित किया। सभी ने मिर्गी के बारे में लोगों को शिक्षित करने के महत्व पर जोर दिया। साथ ही इससे प्रभावित लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए लोगों से जुड़ाव की अपील की।
कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए डॉ. सुमित सिंह ने इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानने और शुरुआती स्तर पर ही इलाज कराने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, ‘मिर्गी के ज्यादातर मामलों में इलाज संभव है, लेकिन फिर भी छुआछूत और ज्यादा देरी से जांच हो पाने के कारण बहुत से लोगों को एकाकी होकर जीना पड़ता है। शुरुआती स्तर पर ही इलाज मिल जाए तो नतीजों पर बहुत सकारात्मक असर पड़ता है। हमारा काम है कि सभी परिवारों को इसके लक्षणों को समझने में मदद करें, शुरुआती स्तर पर ही चिकित्सकीय सहयोग लेने के लिए प्रोत्साहित करें और मिर्गी से पीड़ित लोगों को बिना डर या छुआछूत के जीने में मदद करें।’
कार्यक्रम के दौरान मिर्गी के दौरे से निपटने, इलाज के नए विकल्पों, लाइफस्टाइल में बदलाव और मरीज की देखभाल करने वालों की भूमिका के बारे में बात हुई। चिकित्सकों ने मिर्गी के लाइलाज होने या किसी सुपरनैचुरल फोर्स के कारण यह बीमारी होने जैसे मिथकों पर भी बात की और अपील की कि लोग वैज्ञानिक एवं सहयोगी रुख अपनाएं।
डॉ. आदित्य गुप्ता ने कहा, ‘इसके इलाज के मामले में प्रगति के बावजूद इससे जुड़े मिथक कायम हैं, जिससे पीड़ित लोगों को पर्याप्त इलाज नहीं मिल पाता है। इससे स्वास्थ्य को लेकर लोगों की जागरूकता का महत्व सामने आता है। इस बारे में बात करना भी सहायता देने जैसा ही है। जब ज्यादा से ज्यादा लोगों को मिर्गी के बारे में पता होगा, तो मरीज मजबूत अनुभव करेंगे, परिवार सुरक्षित अनुभव करेंगे और इस बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए ज्यादा सुरक्षित एवं सहयोगी समाज बन सकेगा।’
आर्टेमिस हॉस्पिटल्स और इसके पार्टनर्स जानकारी से पूर्ण ऐसा समाज बनाना चाहते हैं, जहां मिर्गी से प्रभावित लोग सम्मान, आत्मविश्वास और सही सपोर्ट सिस्टम के साथ जी सकें। इस कार्यक्रम में मिर्गी को लेकर भ्रमों को दूर करने में स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं, परिवार के सदस्यों और समाज की महत्वपूर्ण भूमिका को सामने रखा गया, ताकि छुआछूत के डर के बिना इससे प्रभावित लोग इलाज ले सकें।




