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गुरुग्राम, 16 जनवरी। गुरुग्राम पुलिस ने भारी मुनाफे का लालच देकर ठगी करने वाले साइबर ठगों के लिए एक खाते से दूसरे में धन ट्रांसफर करने वाले 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके लिए आरोपियों को चाइनीज बास से निर्देश मिलते थे। आरोपियों के पास से 22 मोबाइल और 1 लैपटॉप भी बरामद किया गया है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 30.09.2025 को एक पीड़ित व्यक्ति द्वारा पुलिस थाना साइबर अपराध मानेसर में एक लिखित शिकायत दी गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि व्हाट्सएप ग्रुप व फर्जी मोबाइल ऐप के माध्यम से स्टॉक ट्रेडिंग एवं आईपीओ में निवेश करके अधिक मुनाफा कमाने का प्रलोभन देकर उसके साथ धोखाधड़ी की गई है। प्राप्त शिकायत पर पुलिस थाना साइबर अपराध मानेसर में संबंधित धाराओं के तहत अभियोग अंकित किया गया।
थाना साइबर अपराध मानेसर प्रभारी मनोज कुमार की टीम ने मामले की गंभीरता से जांच करते हुए इस संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया और इस अपराध में संलिप्त 3 आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विशाल निवासी गांव खोड़ा जिला गाजियाबाद (उत्तर-प्रदेश), धर्मेंद्र निवासी गांव खोड़ा जिला गाजियाबाद (उत्तर-प्रदेश) और असलम निवासी गांव खिजरा जिला हापुड़ (उत्तर-प्रदेश) के रूप में हुई। पुलिस द्वारा विशाल व धर्मेंद्र को 10.11.2026 को गांव खोड़ा गाजियाबाद से गिरफ्तार करके 11.01.2026 को अदालत में पेश किया गया। जहां से उन्हें 2 दिन के पुलिस हिरासत रिमांड पर लिया गया। वहीं आरोपी असलम को 11.01.2026 को लक्ष्मी नगर दिल्ली से गिरफ्तार करके 12.01.2025 को अदालत में पेश किया और 2 दिन के पुलिस हिरासत रिमांड पर लिया गया।
पुलिस हिरासत रिमांड के दौरान पूछताछ में सामने आया कि इस अभियोग में ठगी गई राशि में से 3 लाख रुपये रतिक अहमद के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। रतिक के उस बैंक खाते में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर का सिमकार्ड विशाल रखता था, बाद में विशाल ने यह सिमकार्ड अपने एक अन्य साथी को प्रयोग करने के लिए दे दिया था। विशाल व धर्मेंद्र ने यह भी स्वीकार किया कि ये साइबर ठगी करने वाले आरोपी असलम के लिए कार्य करते थे और इन्हें प्रतिमाह 20 हजार रुपये वेतन के रूप में मिलते थे। 11.01.2026 को लक्ष्मी नगर दिल्ली स्थित असलम के किराए के मकान पर पुलिस टीम द्वारा रेड करके उसे गिरफ्तार किया गया। असलम ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसने यह कमरा 20 हजार रुपये मासिक किराए पर लिया हुआ था तथा वह अपने अन्य साइबर ठगों के कहने पर ठगी की रकम को एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते (लेयरिंग) में ट्रांसफर करने का कार्य करता था, जिसके बदले उसे ट्रांसफर की गई राशि का 1 प्रतिशत कमीशन प्राप्त होता था।
आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड के अवलोकन से ज्ञात हुआ कि धर्मेंद्र के विरुद्ध उत्तर-प्रदेश व दिल्ली में साइबर ठगी करने से संबंधित 3 मामले, असलम के विरुद्ध नोएडा उत्तर-प्रदेश में साइबर ठगी करने का एक अभियोग पहले भी अंकित है।
पुलिस द्वारा रेड और तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से कुल 22 मोबाइल व 1 लैपटॉप बरामद किया गया है।
पुलिस द्वारा विशाल व धर्मेंद्र को 2 दिन के पुलिस हिरासत रिमांड के उपरांत 13.01.2026 को तथा असलम को 2 दिन के पुलिस हिरासत रिमांड के उपरांत 14.01.2026 को अदालत में पेश करके न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। अभियोग का अनुसंधान जारी है।



