माइक्रोसॉफ्ट कंपनी का प्रतिनिधि बनकर करते थे ठगी
तकनीकी सहायता देने के नाम पर करते थे धोखाधड़ी
12 लैपटॉप व 3 मोबाइल बरामद
Bilkul Sateek News
गुरुग्राम, 22 मार्च। गुरुग्राम पुलिस ने कनाडा के नागरिकों को ठगने वाले कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए 2 युवतियों समेत 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके पास 12 लैपटॉप और तीन मोबाइल बरामद किए हैं। आरोपी माइक्रोसॉफ्ट कंपनी का प्रतिनिधि बनकर तकनीकी सहायत देने के नाम पर धोखाधड़ी करते थे। पुलिस जल्द ही इनको अदालत में पेश करेगी।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार थाना साइबर अपराध दक्षिण प्रभारी नवीन कुमार को आज सूत्रों से जानकारी मिली थी कि
बी-ब्लॉक सुशांत लोक फेज-3 में एक फर्जी कॉल सेंटर चल रहा है। जहां से कनाडा के नागरिकों को कस्टमर सर्विस देने के नाम पर धोखाधड़ी की जाती है।
जिसके बाद सहायक पुलिस आयुक्त साइबर अपराध प्रियांशु दीवान के निर्देशन में एक पुलिस रेड टीम गठित की गई और कॉल सेंटर पर छापा मारा गया। पुलिस ने कॉल सेंटर के टीम लीडर और 2 युवतियों समेत 13 आरोपियों को पकड़ा।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार…
1. विशाल दुबे निवासी गांव राजहटा जिला गोरखपुर (उत्तर-प्रदेश)
2. शुभम दुबे निवासी गांव छाछा जिला मैनपुरी (उत्तर-प्रदेश)
3. हर्षित मिश्रा निवासी निवासी कटरा मोहल्ला जिला एटा (उत्तर-प्रदेश)
4. रवि कौशिक निवासी दुर्गा कॉलोनी जिला भिवानी
5. सौरभ तंवर निवासी बाग कोठी लोहार बाजार जिला भिवानी
6. अक्षत कुंडू निवासी गांव हेवा जिला गाजियाबाद (उत्तर-प्रदेश)
7. अंकित चौहान निवासी सेक्टर-18 जिला फरीदाबाद
8. अक्षय निवासी विष्णु नगर गोहाना जिला सोनीपत
9. प्रिंस निवासी कृष्णा कॉलोनी जिला भिवानी
10. सूरज निवासी राजा बिहार, दिल्ली
11. देवांश निवासी गंगा अपार्टमेंट वसुंधरा जिला गाजियाबाद (उत्तर-प्रदेश)
12. निशि शुक्ला निवासी एलडीए कॉलोनी जिला लखनऊ (उत्तर-प्रदेश)
13. दिति शुक्ला निवासी एलडीए कॉलोनी जिला लखनऊ (उत्तर-प्रदेश)
पुलिस ने मामला दर्ज कर सभी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस पूछताछ में पता चला कि सूरज इस कॉल सेंटर का टीम लीडर है और वह साथियों के साथ मिलकर अपने अन्य साथी के कहने पर इस कॉल सेंटर को चलाता है। कॉल सेंटर में कर्मचारियों को प्रतिमाह लगभग 30 हजार रुपये वेतन मिलता था।
वह पिछले एक महीने से अपने साथी के साथ मिलकर यह काम कर रहा था। ये लोग विदेशी मूल के नागरिकों को डपबतवेवजि ैनचचवतज की कस्टमर केयर सर्विस प्रदान करने के नाम पर ठगी करते हैं। आरोपी कनाडा के नागरिकों के कंप्यूटर में पॉप-अप के माध्यम से वायरस भेजते हैं, जिस पॉप-अप में इनका टोल फ्री नंबर लिखा होता है। जब विदेशी नागरिक इनके टोल फ्री नंबर पर कॉल करते है, तो वह कॉल उनके स्टॉफ के लैपटॉप में इंस्टॉल किए हुए एप्लीकेशन पर लैंड होती है। कॉल आने पर कॉल सेंटर के अंदर कार्यरत एजेंट स्वयं को माइक्रोसॉफ्ट कंपनी का प्रतिनिधि बताकर विदेशी नागरिकों को झूठ बोलते हैं कि उनकी बैंकिंग जानकारी फोन कॉल व फोटो आदि की जानकारी लीक हो रही है और हैकरों के पास जा रही है। इसके बाद ये लोग विदेशी नागरिकों को उनकी समस्या दूर करने के नाम पर उनके कंप्यूटर में स्क्रीन शेयरिंग एप्लीकेशन डाउनलोड करवाकर विदेशी नागरिकों के कंप्यूटर सिस्टम का रिमोट एक्सेस प्राप्त कर लेते हैं। इसके बाद यह लोग विदेशी नागरिकों को कहते हैं कि उनका बैंकिंग डाटा लीक हो रहा है इसे सुरक्षित करने के लिए इनका एजेंट उनके बैंक के प्रतिनिधि को कॉल ट्रांसफर करने की बात कहता हैं। उसके बाद दूसरा एजेंट कॉल पर आ जाता है और स्वयं को उनके बैंक हेड ऑफिस का कर्मचारी बताकर उसका अकाउंट चेक करने के बहाने उसके अकाउंट पर 300 से 500 डॉलर तक का चार्ज लगा होना बताते हैं। चार्ज हटाने के नाम पर उतनी ही राशि के गिफ्ट कार्ड खरीदने के लिए बोलते हैं, फिर ये विदेशी नागरिकों से गिफ्ट कार्ड का नंबर पूछ लेते हैं और कहते हैं कि गिफ्ट कार्ड में खर्च किए डॉलर उनके बैंक अकाउंट में रिफंड हो जाएगा। इसके बाद ये गिफ्ट कार्ड नंबर अपने अन्य साथी को भेज देते हैं, जिसको उनका साथी रिडीम कर लेता है।




