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गुरुग्राम, 24 जनवरी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गुरुग्राम द्वारा संघ यात्रा के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित युवा उद्यमी गोष्ठी में राष्ट्र, समाज एवं उद्योग से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि संघ में जातिवाद, भाषावाद और प्रान्तवाद के लिए कोई स्थान नहीं है तथा भारत की सुरक्षा और समृद्धि के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
गोष्ठी में कहा गया कि भारत विश्व को एक परिवार मानने की भावना के साथ कार्य करता है, जिसका उदाहरण कोरोना काल में अन्य देशों को दी गई सहायता है। वक्ताओं ने बताया कि संघ व्यक्ति पूजा में विश्वास नहीं करता, बल्कि परम पवित्र भगवा ध्वज को तत्व रूप में पूजता है।
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि देश की शक्ति बढ़ने से समाज के प्रत्येक व्यक्ति की शक्ति बढ़ती है। आज विश्व में भारतीय उद्योगों की विश्वसनीयता बढ़ रही है, जिसमें युवा उद्यमियों की अहम भूमिका है। पंच परिवर्तन को व्यवहार में उतारने तथा औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलकर भारतीय दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया गया। प्रश्नोत्तर सत्र में वक्ताओं ने कहा कि जागृत, संगठित और सक्रिय हिन्दू समाज ही सभी समस्याओं का समाधान है।



