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गुरुग्राम, 15 नवंबर। गुरुग्राम में स्थित ब्लू बेल्स मॉडल स्कूल प्रांगण आज मानो डिजिटल रोशनी से आलोकित था। CyberMania 2025 केवल एक आईटी उत्सव नहीं, बल्कि भविष्य की उस उड़ान का संकेत था, जिसमें शिक्षा, सृजनशीलता और तकनीक एक साथ कदम मिलाकर चलने को तत्पर थे। शिक्षा 5.0 का अग्रदूत यह विद्यालय सदैव विद्यार्थियों में न केवल डिजिटल दक्षता, बल्कि भविष्य को समझने की दृष्टि भी जगाता रहा है। इस कार्यक्रम में गुरुग्राम और दिल्ली-एनसीआर के कुल 35 विद्यालयों के 400 से अधिक उत्साही आईटी प्रतिभागियों ने 13 विविध प्रतियोगिताओं – ऑनलाइन, ऑफलाइन और हाइब्रिड – में भाग लेकर अपने कौशल और सृजनशीलता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
इस वर्ष का विषय “AI & Tech for Humanity” प्रौद्योगिकी के मानवीय स्पर्श और सामाजिक उत्थान का संदेश देता था। कार्यक्र का सांचालन आईटी विभाग की एसोसिएट डायरेक्टर अंशुका अनेजा के नेतृत्व में किया गया। उद्घाटन समारोह की शोभा डॉ. सरोज सुमन गुलाटी, निदेशिका बीबीजीएस और मुख्य अतिथि सिम्मी धमीजा, COO – AIonOS बढ़ाई, वहीं विविध क्षेत्रों से आए प्रतिष्ठित जजों ने कायिक्रम में ज्ञान और अनुभव का वृहद आयाम जोड़ा। दीप प्रज्ज्वलन, श्लोकों की अनुगूंज और सरस्वती वंदना ने वातावरण को पवित्रता से सरोबार कर दिया। विद्यालय की प्रधानाचार्या अल्का सिंह ने अपने प्रेरक संबोधन में प्रतियोगिताओं को विद्यार्थियों की प्रतिभा का दर्पण बताया। उद्घाटन के साथ ही विद्यालय परिसर नवाचार की ऊर्जा, सॉफ्टवेयर की क्लिकों, रोबोटिक्स की गति और युवा सपनों की चमक से भर उठा।

समापन समारोह में प्रस्तुत झलकियों का संक्षिप्त चलचित्र, मानो दिन भर की रचनात्मकता का उज्ज्वल दस्तावेज था। मंच पर प्रस्तुत फ्यूजन डांस ने तकनीक और कला के सुरों को एकता में पिरो दिया। जजोंऔर मुख्य अतिथि के पेरक शब्द विद्यार्थियों के सपनों को और ऊंचाई देने वाले थे। पुरस्कार वितरण में विजेताओं की चमकती मुस्कानें इस बात की गवाही थीं कि CyberMania 2025 ने उन्हें न केवल सम्मान, बल्कि दिशा भी दी। दिल्ली पब्लिक स्कूल सेक्टर 45 गुरुग्राम विजेता बना, जबकि ब्रह्म दत्त ब्लू बेल्स पब्लिक स्कूल उपविजेता रहा।
सभी जजों और अतिथियों को स्मृति-चिह्न भेंट किए गए। अंत में अंशु कुमार मलिका ने धन्यवाद
प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
CyberMania 2025 विद्यालय के डिजिटल शिक्षा मिशन का सफल उदाहरण साबित हुआ और विद्याथियों को 21वीं सदी की तकनीक-प्रधान दुनिया के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा।
एक ऐसा अनुभव जो बताता है कि भविष्य उन्हीं का है, जो नवाचार के प्रकाश को ज्ञान और संवेदना से जोड़ना जानते हैं।




