पुलिस अधिकारियों पर बरसा महिला आयोग
DGP से होगी पुलिस अधिकारियों की शिकायत
Bilkul Sateek News
फरीदाबाद (अजय वर्मा), 28 नवंबर। महिलाओं से जुड़े मामलों में पुलिस अधिकारियों का सहयोग न मिलने पर हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया ने साफ कहा कि वह इस बारे में डीजीपी को लेटर लिखेंगी। उन्होंने बताया कि फरीदाबाद में हुई जनसुनवाई में जिस तरह पुलिस अधिकारियों द्वारा लापरवाही और गैर–जिम्मेदारी देखने को मिली, वह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। रेनू भाटिया गुरुवार को फरीदाबाद में महिलाओं से जुड़े 38 मामलों की जनसुनवाई के लिए पहुंचीं। यहां कई केसों में पुलिस द्वारा शिकायतकर्ताओं को सही जानकारी न देने, केस की स्थिति न बताने और समय पर सुनवाई में सहयोग न करने की शिकायतें सामने आईं। इस पर वह नाराज नजर आईं और उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि पुलिस का इस तरह का ढीलापन महिलाओं के मामलों को और जटिल बना देता है। उन्होंने बताया कि अक्सर शिकायतकर्ता महिलाओं को यह तक नहीं बताया जाता कि उन्हें किस दिन आना है। कौन से दस्तावेज लाने हैं और केस की अगली प्रक्रिया क्या है। इस कारण केस समय पर आगे नहीं बढ़ पाते। उन्होंने कहा कि डीजीपी पहले ही महिला सुरक्षा को लेकर सख्त निर्देश दे चुके हैं, इसके बावजूद आज की जनसुनवाई में कई महिला पुलिसकर्मियों और अधिकारियों में लापरवाही साफ दिखाई दी। जनसुनवाई के दौरान ही उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यदि आगे भी ऐसे मामले आते रहे तो पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तय होगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी केस में दोनों पक्ष मौजूद नहीं होते, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित पुलिस अधिकारी की मानी जाएगी और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि जनसुनवाई एक बड़ी प्रक्रिया होती है, जिसमें IO, एरिया SHO, एरिया DSP और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों का उपस्थित रहना अनिवार्य है। लेकिन आज कई अधिकारी अनुपस्थित थे, जो गंभीर लापरवाही का संकेत है। इसी कारण उन्होंने निर्णय लिया कि इस पूरे मामले की जानकारी डीजीपी को भेजी जाएगी, ताकि अनुशासन और सहयोग सुनिश्चित किया जा सके। मीडिया से बातचीत में रेनू भाटिया ने कहा कि महिला पुलिसकर्मियों को महिलाओं से जुड़े मामलों में और अधिक संवेदनशीलता, समझ और गंभीरता के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बार-बार तारीखें देने से पुलिस का भी समय खराब होता है और आयोग का भी और मामलों का समाधान भी देर से होता है।
जनसुनवाई में कुल 38 मामलों की सुनवाई की गई। इनमें से 25 से अधिक मामलों का निपटारा कर दिया गया। 5 मामलों को मौके पर ही सुलझा लिया गया, 5 मामलों को रद्द किया गया और 5 मामलों की सुनवाई 10 दिन बाद फिर की जाएगी।




