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Reporter: Pardeep Narula
Author: Pardeep Narula
गुरुग्राम में पानी की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए चंदू बुढ़ेड़ा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में 100 एमएलडी क्षमता की नई यूनिट लगाई जाएगी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सोमवार को चंडीगढ़ में हुई हाई पावर वर्क्स परचेज कमेटी की बैठक में इसके टेंडर को मंजूरी दे दी गई। इस यूनिट से खासतौर पर द्वारका एक्सप्रेसवे के आसपास बसे सेक्टरों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

नई यूनिट के शुरू होने से सेक्टर 81 से 115 और आसपास के इलाकों में पानी की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी। तेजी से विकसित हो रहे नए गुरुग्राम में बड़ी संख्या में रिहायशी सोसायटियां और नए सेक्टर बस रहे हैं। ऐसे में आने वाले वर्षों में पानी की जरूरत को देखते हुए सप्लाई सिस्टम की क्षमता बढ़ाई जा रही है।
जीएमडीए के सीईओ पीसी मीणा ने कहा कि गुरुग्राम की बढ़ती आबादी के हिसाब से बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना जरूरी है। चंदू बुढ़ेड़ा प्लांट में नई यूनिट बनने से मौजूदा और नए सेक्टरों में पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि जीएमडीए वर्ष 2051 तक शहर की पानी की जरूरत का आकलन भी कर रहा है, ताकि भविष्य की मांग के अनुसार योजनाएं तैयार की जा सकें।
15 एकड़ में बनेगी नई यूनिट, होगी ऑटोमैटिक मॉनिटरिंग: नई यूनिट चंदू बुढ़ेड़ा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट परिसर में 15 एकड़ जमीन पर बनाई जाएगी। इसमें पानी स्टोर करने के लिए क्लियर वाटर रिजर्वायर, कच्चे और साफ पानी की पंपिंग व्यवस्था और स्लज को मशीनों से सुखाने की सुविधा भी होगी।
प्लांट को जीएमडीए के एससीएडीए नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे प्लांट के कामकाज की ऑटोमैटिक निगरानी की जा सकेगी और संचालन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। परियोजना का काम आवंटित होने के 24 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
दोनों प्लांट से रोजाना 770 एमएलडी पानी की सप्लाई: फिलहाल जीएमडीए चंदू बुढ़ेड़ा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से करीब 500 एमएलडी और बसई प्लांट से 270 एमएलडी पानी की सप्लाई कर रहा है। दोनों प्लांट से रोजाना कुल 770 एमएलडी पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
चंदू बुढ़ेड़ा में 100 एमएलडी की नई यूनिट शुरू होने के बाद इस प्लांट की क्षमता में और बढ़ोतरी होगी। इससे गुरुग्राम की बढ़ती आबादी और तेजी से हो रहे शहरी विकास के बीच पानी की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
जीएमडीए की योजना वर्ष 2051 तक शहर में पानी की संभावित मांग का आकलन करके जरूरत के हिसाब से नए प्रोजेक्ट तैयार करने की है। इसका मकसद पुराने और नए, दोनों तरह के रिहायशी इलाकों में पानी की सप्लाई को बेहतर बनाना है।




