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Reporter: Pardeep Narula
Author: Pardeep Narula
गुरुग्राम में 215 शिकायतों की समीक्षा, 62 अधिकारियों को नोटिस
24 घंटे चैलेंज के तहत नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने की कार्रवाई की समीक्षा, 2 मामलों में लगा जुर्माना; 151 मामलों में जुर्माना लगाने से किया इनकार
गुरुग्राम, 31 अक्टूबर। शहर में सफाई व्यवस्था और नागरिकों की शिकायतों के समाधान में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर नगर निगम ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। 24 घंटे चैलेंज मुहिम के तहत नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने अलग-अलग जोन में सामने आए 215 मामलों की समीक्षा की। इस दौरान 2 मामलों में जुर्माना लगाया गया, जबकि 62 मामलों में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं, 151 मामलों में जुर्माना लगाने से इनकार कर दिया गया।

नगर निगम की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य नागरिकों की शिकायतों का समय पर समाधान करना और सफाई व्यवस्था से जुड़े मामलों में अधिकारियों की जवाबदेही तय करना है। निगम की ओर से स्पष्ट किया गया है कि शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा और लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा।
तीन दिन में देना होगा नोटिस का जवाब: नगर निगम की ओर से तय प्रक्रिया के मुताबिक, जब किसी शिकायत पर नागरिक की ओर से नकारात्मक फीडबैक मिलता है या सेवा स्तर समझौते (एसएलए) के तहत तय समय में काम पूरा नहीं होता, तो सबसे पहले संबंधित क्लस्टर हेड मामले की समीक्षा करते हैं।
इसके बाद संबंधित जोन के अधिकारी या कर्मचारी को नोटिस जारी किया जाता है। नोटिस मिलने के तीन दिन के भीतर जवाब देना जरूरी होता है। अधिकारी या कर्मचारी की ओर से दिए गए जवाब की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाता है।
नगर निगम ने यह भी व्यवस्था की है कि जब तक शिकायत का संतोषजनक समाधान नहीं हो जाता, तब तक संबंधित अधिकारी या कर्मचारी का वेतन रोका जा सकता है। इस व्यवस्था का मकसद केवल शिकायतों का निपटारा करना ही नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि जिम्मेदार अधिकारी अपने काम को गंभीरता से लें।
किस जोन में कितने मामलों की हुई समीक्षा?: नगर निगम आयुक्त की समीक्षा में सभी छह जोन के मामले शामिल रहे। जोन के हिसाब से कार्रवाई का ब्योरा इस प्रकार है:
- जोन-1: कुल 24 मामलों की समीक्षा हुई। इनमें एक मामले में जुर्माना लगाया गया, 21 मामलों में जुर्माना लगाने से इनकार किया गया और 2 मामलों में नोटिस जारी किए गए।
- जोन-2: यहां 2 मामलों की समीक्षा हुई और दोनों में जुर्माना नहीं लगाया गया।
- जोन-3: कुल 16 मामलों में से एक में जुर्माना लगाया गया, 4 में जुर्माना अस्वीकार किया गया और 11 मामलों में नोटिस जारी हुए।
- जोन-4: यहां सबसे ज्यादा 67 मामलों की समीक्षा की गई। इनमें 54 मामलों में जुर्माना नहीं लगाया गया, जबकि 13 मामलों में नोटिस जारी किए गए।
- जोन-5: कुल 17 मामलों में से 13 में जुर्माना अस्वीकार किया गया और 4 मामलों में नोटिस जारी किए गए।
- जोन-6: यहां 89 मामलों की समीक्षा हुई। इनमें 57 मामलों में जुर्माना नहीं लगाया गया, जबकि 32 मामलों में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस दिए गए।
आंकड़ों के मुताबिक, जोन-6 में सबसे ज्यादा 89 मामलों की समीक्षा हुई और यहां 32 नोटिस जारी किए गए। इसके बाद जोन-4 में 67 मामलों की समीक्षा के दौरान 13 नोटिस जारी किए गए।
कचरा प्रबंधन और खाली प्लॉट बने बड़ी परेशानी: गुरुग्राम में सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नगर निगम ने कुछ ऐसे इलाकों की पहचान की है, जहां कचरा प्रबंधन की समस्या लगातार सामने आ रही है। इनमें पालम विहार, सेक्टर-23, सेक्टर-45, सुशांत लोक-1, आरडी सिटी, सेक्टर-56 और सेक्टर-57 शामिल हैं।
इन इलाकों में खाली प्लॉटों में कचरा जमा होना भी सफाई व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। नगर निगम के अनुसार, कई खाली प्लॉटों के मालिक उनकी नियमित सफाई और देखभाल नहीं करते। इसके चलते लोग इन जगहों पर कचरा डालने लगते हैं और धीरे-धीरे ये स्थान कचरा डालने के हॉटस्पॉट बन जाते हैं।
ऐसे स्थानों पर सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियमित निगरानी की जरूरत है। साथ ही खाली प्लॉटों के मालिकों और संबंधित जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करना भी जरूरी है।
शिकायतों पर कार्रवाई के साथ जवाबदेही भी तय होगी: नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने कहा कि निगम ने शिकायतों की समीक्षा से लेकर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगने और अंतिम निर्णय लेने तक की पूरी प्रक्रिया तय की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नागरिकों की शिकायतों को अनदेखा न किया जाए और सेवा में लापरवाही सामने आने पर उचित कार्रवाई हो।
नगर निगम की 24 घंटे चैलेंज मुहिम के तहत की जा रही यह समीक्षा शहर की सफाई व्यवस्था और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। अब देखना होगा कि नोटिस और जवाबदेही की इस प्रक्रिया का असर जमीनी स्तर पर सफाई व्यवस्था में कितना सुधार ला पाता है।




