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Reporter: Pardeep Narula
Author: Pardeep Narula
गुरुग्राम में विजयदशमी पर RSS के शस्त्र पूजन और पथ संचलन कार्यक्रम, पंच परिवर्तन अपनाने का आह्वान
गुरुग्राम, 20 अक्टूबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ओर से विजयदशमी के अवसर पर गुरुग्राम महानगर में 60 से अधिक स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान शस्त्र पूजन, घोष के साथ पथ संचलन और बौद्धिक कार्यक्रम हुए। स्वयंसेवकों ने अनुशासन के साथ पथ संचलन में भाग लिया। कुछ स्थानों पर आगामी रविवार को भी पथ संचलन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

विश्व संवाद केंद्र, हरियाणा की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, संघ की संगठनात्मक व्यवस्था में गुरुग्राम महानगर को 18 नगरों में बांटा गया है। इनमें सरस्वती नगर में ही 12 स्थानों पर विजयदशमी के कार्यक्रम हुए। कार्यक्रमों के दौरान प्रचार विभाग की ओर से साहित्य स्टॉल भी लगाए गए, जहां कन्या पूजन और गृह संपर्क से जुड़ी पुस्तकों सहित अन्य साहित्य का वितरण किया गया।
विजयदशमी के महत्व और सामाजिक समरसता पर चर्चा: कार्यक्रमों में वक्ताओं ने विजयदशमी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर बात की। उन्होंने कहा कि यह पर्व बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का संदेश देता है। इसी महत्व के कारण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विजयदशमी को अपने छह प्रमुख उत्सवों में शामिल करता है।
वक्ताओं ने भगवान श्रीराम के जीवन का उल्लेख करते हुए सामाजिक समरसता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि श्रीराम ने वनवासी वानरों को अपनाकर समाज में समानता और आपसी जुड़ाव का संदेश दिया। इस दौरान संत रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व का भी जिक्र किया गया और समाज में समरसता बढ़ाने में उनके योगदान को याद किया गया।
संघ की 101 साल की यात्रा और पंच परिवर्तन पर जोर: बौद्धिक कार्यक्रमों में संघ की वर्ष 1925 में स्थापना से लेकर अब तक की 101 साल की यात्रा पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने व्यक्ति निर्माण के जरिए राष्ट्र निर्माण के लक्ष्य और शिक्षा, सेवा, मजदूर व किसान जैसे क्षेत्रों में संघ से प्रेरित संगठनों के कामों का उल्लेख किया।
इसके साथ ही समाज और देश से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों के समाधान के लिए पंच परिवर्तन को अपनाने की अपील की गई। इसमें सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी आचरण और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं। वक्ताओं ने स्वयंसेवकों से इन पांच विषयों को अपने जीवन में अपनाने और इनके लिए व्यक्तिगत लक्ष्य तय करने को कहा।
कार्यक्रमों में समाज में सकारात्मक सोच और संवाद को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं का कहना था कि नकारात्मक चर्चाओं के बीच सकारात्मक विमर्श को आगे बढ़ाना जरूरी है।




