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Reporter: Sonu Rana
Author: Sonu Rana
नई दिल्ली।
पहले लोग छुट्टिया मनाने और सस्ती मसाज के लिए बैंकॉक जाते थे। लेकिन अब कई भारतीय वहां से हाई क्वालिटी गांजा, जिसे हाइड्रोपोनिक वीड भी कहा जाता है, भारत ला रहे हैं। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने हाल के दिनों में बैंकॉक से आने वाली उड़ानों में कई बार करोड़ों रुपये का गांजा पकड़ा है। तस्कर अब थाईलैंड को ड्रग्स का हब बना रहे हैं। नतीजन दिल्ली एयरपोर्ट पर भी रोज कई लोग गांजे के साथ पकड़े जा रहे हैं। वहीं कुछ लोग गांजा लेकर एयरपोर्ट से बाहर भी निकल जा रहे हैं।

सबसे ताजा मामला अप्रैल का है। 20 अप्रैल को बैंकॉक से आई उड़ान टीजी-331 में दो लावारिस ट्रॉली बैग मिले, जिनमें करीब 18.57 करोड़ रुपये का गांजा था। ठीक एक दिन बाद 21 अप्रैल को उड़ान एआई-2333 से आए चार भारतीय यात्रियों के बैगों में से करीब 8.92 करोड़ रुपये का गांजा बरामद हुआ। दोनों मामलों में कुल 27.5 करोड़ रुपये का गांजा बरामद हुआ। चार यात्रियों को गिरफ्तार किया गया।
2026 में बैंकॉक से दिल्ली एयरपोर्ट पर मुख्य गांजा बरामदगी
20 अप्रैल: 18.57 करोड़ रुपये का गांजा
21 अप्रैल 2026: 8.92 करोड़ का गांजा
31 मार्च : 12.91 करोड़ रुपये का गांजा
16 फरवरी : 6 करोड़ रुपये का गांजा
29 जनवरी : 4.9 करोड़ रुपये का गांजा
2025 में पकड़ा गया गांजा
अक्टूबर : 2.5 करोड़ करोड़ रुपये का गांजा
अक्टूबर : 3 करोड़ रुपये का गांजा
अक्टूबर: 7 करोड़ रुपये का गांजा
रेव पार्टियों में इस्तेमाल किया जाता है यह गांजा
कस्टम अधिकारियों की माने तो थाईलैंड में गांजा को कानूनी मान्यता मिलने के बाद तस्कर वहां से उच्च गुणवत्ता वाला ‘हवाइयन’ या हाइब्रिड गांजा आसानी से खरीदकर भारत ला रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर में रेव पार्टियों और अमीर युवाओं में इसकी भारी डिमांड है। कई लोग सिर्फ कूरियर बनकर काम कर रहे हैं, जबकि पीछे बड़ा सिंडिकेट है।
बैंकॉक से आने वाले यात्रियों पर विशेष ध्यान
एजेंसियां जांच कर रही है कि ये तस्कर दिल्ली से गांजा दूसरे शहरों में भी सप्लाई करते हैं या नहीं। हालांकि इन दिनों कस्टम का बैंकॉक से आने वाले यात्रियों पर खास ध्यान है। क्योंकि गांजे को छोटे-छोटे पैकेट में लाने के मामले बढ़ गए हैं। यहां पर यह भी बता दें कि एयरपोर्ट पर उतरने के बाद यह बताना मुश्किल होता है कि किस यात्री के पास गांजा है। पुलिस गुप्त सूचना या ट्रैवल हिस्ट्री के हिसाब से भी आरोपियों को पकड़ती है।
एयरपोर्ट के बाहर खड़े रहते हैं लोग
सूत्रों की माने तो बैंकॉक से लोग गांजा लेकर आते हैं और एयरपोर्ट के बाहर खड़े लोगों को दे देते हैं। इसके लिए लोगों को रुपये दिए जाते है। बाद में यह गांजा अलग-अलग जगह जगह सप्लाई कर दिया जाता है।
भारतीय गांजे से अलग होता है यह गांजा
बात की जाए भारतीय गांजे की तो इसकी कीमत हजारों में होती है, जबकि बैंकॉक से लाया गया एक किलो गांजा एक करोड़ रुपये के करीब का बताया जाता है। इस गांजे को हाइड्रोपोनिक तकनीक से उगाया जाता है। बाद में इसे अलग-अलग सामान में पैक करके भेज दिया जाता है। गांजे की तस्करी के लिए अलग से गैंग बने हुए हैं।




