Bilkul Sateek News
Reporter: Sonu Rana
Author: Sonu Rana
नई दिल्ली।
दिल्ली के आउटर नॉर्थ जिले की साइबर थाना पुलिस ने साइबर ठगी के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस नेटवर्क में म्यूल बैंक अकाउंट और शेल कंपनियों का इस्तेमाल कर पूरे देश और विदेश से ठगे गए पैसे को घुमाया जाता था। सिर्फ 8 दिनों में इस एक अकाउंट में 16 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेनदेन हुआ। पुलिस ने दो डमी डायरेक्टरों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों की पहचान सोनू कुमार और अमिंदर सिंह के रूप में हुई है। पुलिस मामले में आगे की जांच कर रही है।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि म्यूल हंटिंग अभियान के तहत संदिग्ध अकाउंट की जांच की गई तो पता चला कि मेसिट ट्रेडैक्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी का बैंक अकाउंट बवाना के नेशनल बैंक में है। यह अकाउंट कई ठगी के मामलों से जुड़ा है। यह अकाउंट पूरे देश में दर्ज 336 साइबर ठगी शिकायतों से लिंक पाया गया।
जांच में सामने आया कि कंपनी का बिजनेस प्रोफाइल कुछ और था, लेकिन अकाउंट में असामान्य तरीके से पैसे आ-जा रहे थे। यह अकाउंट म्यूल अकाउंट के रूप में काम कर रहा था और पैसे को कई लेयर्स में घुमाया जा रहा था। पुलिस टीम ने तकनीकी जानकारी, वित्तीय विश्लेषण और फील्ड ऑपरेशन के जरिए दो आरोपियों को पकड़ा। सोनू कुमार और अमिंदर सिंह, दोनों मेसिट ट्रेडैक्स प्राइवेट लिमिटेड के डमी डायरेक्टर थे।
35 से ज्यादा शेल कंपनियों से लिंक था अकाउंट
पुलिस ने कंपनी के बैंक अकाउंट और ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड, डिजिटल सुबूत, पैसे के ट्रेल और शिकायतों का मैपिंग, शेल कंपनी खोलने के लिए इस्तेमाल किए गए केवाईसी दस्तावेज इकट्ठा किए। इस दौरान पता लगा कि एक ही अकाउंट 336 ठगी मामलों से जुड़ा हुआ है। वहीं सिर्फ 8 दिनों में 16 करोड़ रुपये इस खाते में आए। यही एक खाता 35 से ज्यादा संदिग्ध शेल कंपनियों से लिंक पाया गया। दिल्ली के पीतमपुरा, रानी बाग और एनएसपी इलाके ऐसे नेटवर्क के हॉटस्पॉट पाए गए। अकाउंट को रिमोट से संचालित किया जाता था, जबकि असली कंट्रोल इंटरस्टेट और विदेशी ठगों के हाथ में था।
गरीबों के नाम पर खुलवाई जाती थी कंपनी
गैंग गरीब और बेरोजगार लोगों को नौकरी या आसान कमाई का लालच देकर फंसाता था। उन्हें डमी डायरेक्टर बनाता था। उनके नाम पर कंपनी और बैंक अकाउंट खुलवाए जाते थे। लेकिन मोबाइल नंबर, ईमेल, नेट बैंकिंग और यूपीआई का पूरा कंट्रोल गैंग के हैंडलर के पास रहता था। ठगे गए पैसे इन अकाउंट में आते, फिर कई अकाउंटों में घुमाए जाते और ट्रेल मिटा दी जाती। डमी डायरेक्टरों को सिर्फ थोड़े पैसे दी जाती थी। वे अकाउंट में होने वाले लेन-देन के बारे में कुछ नहीं जानते थे।
एेसा कभी भी न करें
-किसी को भी कमीशन या किराए के नाम पर अपना बैंक अकाउंट न दें
-बिना जांच के किसी अंजान कंपनी का डायरेक्टर न बनें
-अपना केवाईसी दस्तावेज किसी अनजान व्यक्ति से साझा न करें
-अगर ठगी हो तो 1930 हेल्पलाइन या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत करें
जो लोग म्यूल अकाउंट, शेल कंपनी या फाइनेंशियल चैनल साइबर अपराधियों को देते हैं, वे सिर्फ उनकी मदद नहीं करते बल्कि संगठित आर्थिक अपराध को बढ़ावा देते हैं। मिशन म्यूल हंटिंग के तहत हम इस नेटवर्क की हर परत को तोड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं।




