file photo source: social media
Bilkul Sateek News
सिरसा, 2 जनवरी। सिरसा जिला जेल के वार्डन सुखदेव सिंह ने सल्फास खाकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या से पहले वार्डन ने 2 सुसाइड नोट भी छोड़े हैं, जिसमें उसने DSP समेत 2 अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जिसमें कहा गया कि दोनों ने मुझे ड्यूटी लगाने को लेकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का दबाव बनाया। वहीं, जेल वार्डन के परिजनों ने सिरसा पुलिस पर इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। फिलहाल हुडा पुलिस मामले की जांच कर रही है। मृतक के परिजनों ने जेल के डीएसपी सहित 2 अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर इस मामले में सिरसा पुलिस ने जब तक आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की तब तक वे शव नहीं लेंगे। फ़िलहाल इस मामले को लेकर सिरसा पुलिस मीडिया को कुछ भी बताने से बचती नजर आ रही है।
सुसाइड से पहले वार्डन ने अपने बेटे को फोन भी किया था। जिसमें उसने कहा था कि दोनों अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर मैं जहरीला पदार्थ खा रहा हूं। मेरे बैग में जेल महानिदेशक और जेल सुपरिंटेंडेंट के नाम लिखा सुसाइड नोट रखा है। मैं इन दरिंदों से हार गया। अपना और मां का ख्याल रखना। वार्डन के परिवार ने हुडा चौकी में दोनों अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दी है।
मीडिया से बातचीत करते हुए सुखदेव के बेटे जसपाल और पिता दीप सिंह ने बताया कि कल शाम 5 बजे मेरे पास पिता का फोन आया। तब उन्होंने सल्फास निगल ली थी। उन्होंने DSP और LO को अपनी मौत का जिम्मेदार बताया। मैं अपने परिवार के साथ एक घंटे में मौके पर पहुंच गया।
बेटे ने बताया कि पहले पिता को सिविल अस्पताल ले गए। फिर उनकी गंभीर हालत को देखते हुए प्राइवेट अस्पताल में ले गए। रात को उनकी इलाज के दौरान मौत हो गई। सूचना मिलते ही सुपरिंटेंडेंट भी मौके पर आ गए। दोनों अधिकारी उन्हें बहुत परेशान कर रहे थे। मेरे पिता हार्ट पेशेंट हैं। उन्हें 2 स्टंट डले हुए हैं। सुखदेव के बेटे ने आरोप लगाया कि उसके बाद भी पिता को जातिसूचक गालियां दी गईं। इसलिए पिता ने यह कदम उठा लिया।
जेल महानिदेशक, हरियाणा कारागार विभाग, पंचकूला, डीसी सिरसा एवं पुलिस सुपरिंटेंडेंट सिरसा के नाम लिखे सुसाइड नोट में सुखदेव सिंह ने लिखा- “श्रीमान, मैं पिछले 7 साल से जिला जेल सिरसा में वार्डन के पद पर कार्यरत हूं। मैं पिछले 6 साल से दिल की बीमारी से पीड़ित हूं। 14 दिसंबर को मैंने पुलिस उप सुपरिंटेंडेंट सिक्योरिटी से अनुरोध किया कि मेरी रात की ड्यूटी न लगाई जाए, जिस पर वे भड़क गए और मुझसे कहने लगे कि ‘आपको कोट मीना दीवार के नीचे ही रखेंगे।’ उन्होंने लगातार 15 दिन तक मुझे तंग किया। 31 दिसंबर 2025 को फिर शाम 6 बजे उन्होंने मुझे बुरा-भला कहा। मैंने नए साल पर जेल सुपरिंटेंडेंट के सामने, अपनी गार्ड के सामने माफी मांगी। इसके बाद एलओ और डीएसपी आए और सारा दिन मुझे ड्यूटी में खड़ा रखा और मुझे ड्यूटी पर लेने से इनकार कर दिया। बेटा, मैं दरिंदों से हार गया। बेटे, मुझे माफ कर देना। हिमांशु और अपनी मां और अंजू का ख्याल रखना। आई लव यू।”
दूसरे नोट में सुखदेव ने लिखा, “जेल सुपरिंटेंडेंट महोदय, मैं आज सुबह आपके निवास पर नए साल की मुबारकबाद देने आया और तमाम गार्ड के सामने माफी मांगी। पूरी गार्ड ने आपसे मुझे माफ करने की मिन्नत की, जिसे आपने स्वीकार कर लिया। फिर भी एलओ ने मुझे ड्यूटी पर नहीं लिया और सारा दिन खड़ा रखा गया।
अब शाम को निराश होकर मैं इन दोनों अधिकारियों से तंग आकर आत्महत्या जैसा कदम उठा रहा हूं। डीएसपी और एलओ ने 15 दिन से मुझे परेशान किया। सर, मैं आपसे दोबारा माफी मांगता हूं। मुझे माफ करें और मुझे इंसाफ दिलाना, सर। आपकी मेहरबानी होगी। प्रार्थी, सुखदेव।”




