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Reporter: Pardeep Narula
Author: Pardeep Narula
गुरुग्राम में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता कम होने लगी है, जिसका सीधा असर शहर के रेस्टोरेंट, ढाबों और क्लाउड किचन कारोबार पर पड़ रहा है। कई कारोबारियों के मुताबिक उनके पास गैस का स्टॉक अब सिर्फ दो से तीन दिन का ही बचा है, जबकि नए सिलेंडर हासिल करने में भी देरी हो रही है।

सूत्रों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय हालातों के चलते एलपीजी की आयात आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसी वजह से स्थानीय स्तर पर भी सिलेंडरों की उपलब्धता कम हो गई है और गैस एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है।
तीन कंपनियों से होती है सप्लाई
गुरुग्राम में कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई मुख्य रूप से इंडियन ऑयल की इंडेन गैस, हिंदुस्तान पेट्रोलियम की एचपी गैस और भारत पेट्रोलियम की भारत गैस के जरिए होती है। जिले में लगभग 48 गैस एजेंसियां संचालित हैं जो घरेलू और व्यावसायिक दोनों तरह के सिलेंडर उपलब्ध कराती हैं।
मांग बढ़ने से डिलीवरी प्रभावित
गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि हाल के दिनों में कमर्शियल सिलेंडरों की मांग अचानक काफी बढ़ गई है। इससे डिलीवरी सिस्टम पर दबाव बन गया है और कई क्षेत्रों में गैस पहुंचने में दो से तीन दिन का अतिरिक्त समय लग रहा है। एजेंसियां फिलहाल घरेलू ग्राहकों को प्राथमिकता दे रही हैं, जिसके कारण व्यावसायिक उपभोक्ताओं को सिलेंडर मिलने में ज्यादा परेशानी हो रही है।
फूड कारोबारियों की चिंता बढ़ी
गुरुग्राम में हर दिन करीब चार से पांच हजार कमर्शियल गैस सिलेंडरों की खपत होती है। यह गैस रेस्टोरेंट, होटल, ढाबों और क्लाउड किचन जैसे खाद्य व्यवसायों की मुख्य जरूरत है। सप्लाई प्रभावित होने से इन कारोबारों के सामने संचालन बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है। कुछ बड़े प्रतिष्ठानों ने पहले ही पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) का विकल्प अपना लिया है, लेकिन छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसाय अब भी सिलेंडरों पर ही निर्भर हैं।
महंगे दाम पर गैस लेने को मजबूर
सिलेंडरों की कमी के बीच कई जगह छोटे सिलेंडर ऊंचे दामों पर बिकने की खबरें भी सामने आ रही हैं। कुछ उपभोक्ताओं को करीब 200 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से गैस मिल रही है। इसको लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है।
ब्लैक मार्केट का सहारा
सेक्टर 56 के एक क्लाउड किचन संचालक ने बताया कि एजेंसी ने फिलहाल कमर्शियल सिलेंडरों की बुकिंग रोक दी है। ऐसे में उन्हें खुले बाजार से ज्यादा कीमत देकर सिलेंडर खरीदने पड़े। उन्होंने बताया कि लगभग 15 हजार रुपये खर्च कर चार सिलेंडर का इंतजाम किया गया है, जिससे कुछ दिनों तक काम चल सकेगा।
मेन्यू सीमित करने की नौबत
अगर स्थिति जल्द सामान्य नहीं होती तो कई रेस्टोरेंट को अपने मेन्यू में कटौती करनी पड़ सकती है। कुछ जगहों पर पहले ही ग्रिल और तंदूरी आइटम अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं और केवल जल्दी बनने वाले व्यंजन ही परोसे जा रहे हैं।
छोटे कारोबार पर सबसे ज्यादा दबाव
क्लाउड किचन और छोटे खाद्य व्यवसाय पहले ही प्रतिस्पर्धा और ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म के दबाव का सामना कर रहे हैं। ऐसे में गैस संकट उनके लिए एक और बड़ी चुनौती बन सकता है। अगर आने वाले दिनों में सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो कई कारोबारियों को अस्थायी बंदी या स्टाफ कम करने जैसे फैसले लेने पड़ सकते हैं।




