गुरुग्राम में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से संकट, 12 घंटे में 3000 से ज्यादा शिकायतें
गुरुग्राम: बिजली निगम के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों की हड़ताल का असर अब गुरुग्राम में दिखने लगा है। शहर के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि हड़ताल शुरू होने के महज 12 घंटे के भीतर बिजली निगम के पास 3000 से ज्यादा शिकायतें पहुंच गईं। बिजली संकट के कारण पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है।

रात से ही आने लगीं बिजली कटौती की शिकायतें: बिजली निगम के कर्मचारियों की हड़ताल बुधवार रात 10 बजे से शुरू हुई। इसके बाद शहर के अलग-अलग इलाकों से बिजली गुल होने की शिकायतें आने लगीं। कर्मचारियों के मुताबिक, रात के दौरान निगम को 945 शिकायतें मिलीं। वहीं, सुबह महज दो घंटे में 2245 और शिकायतें दर्ज हुईं।
ऑनलाइन माध्यमों और कॉल सेंटर पर भी लोगों की शिकायतें लगातार पहुंचती रहीं। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ा। बिजली नहीं होने के कारण पानी की सप्लाई में भी दिक्कत आई। वहीं, घरों में खाना बनाने से लेकर दूसरे जरूरी कामों तक में लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी।
निजीकरण के विरोध में हड़ताल पर कर्मचारी: बिजली निगम की कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि सरकार की ओर से मांगों पर ध्यान नहीं दिए जाने के कारण उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा है। कर्मचारियों ने पहले भी सरकार को चेतावनी दी थी, लेकिन उनकी मांगों पर सहमति नहीं बनने के बाद उन्होंने तीन दिन की सांकेतिक हड़ताल शुरू कर दी।
कर्मचारियों का मुख्य विरोध बिजली निगम को निजी हाथों में सौंपने के फैसले को लेकर है। उनका कहना है कि निजीकरण के फैसले को वापस लेने के साथ ही लंबे समय से लंबित मांगों पर भी सरकार को फैसला करना चाहिए।
फॉल्ट ठीक नहीं होने से बढ़ सकती है परेशानी: हड़ताल के दौरान बिजली लाइनों में आने वाली खराबियों को ठीक करने का काम प्रभावित होने की बात भी सामने आई है। कर्मचारियों के मुताबिक, इसी वजह से कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल करने में परेशानी हो रही है।
बिजली संकट का असर आम लोगों के साथ-साथ पानी की सप्लाई पर भी पड़ रहा है। ऐसे में अगर बिजली आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं होती, तो लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
24 तारीख को तय होगी आगे की रणनीति: कर्मचारी यूनियनों ने साफ किया है कि अगर सरकार निजीकरण का फैसला वापस लेने और कर्मचारियों की मांगों पर बातचीत करने को तैयार नहीं होती, तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है।
कर्मचारियों के मुताबिक, 24 तारीख को संयुक्त संघर्ष समिति के साथ बातचीत कर अगली रणनीति तय की जाएगी। अगर मांगों पर सहमति नहीं बनी, तो तीन दिन की सांकेतिक हड़ताल को अनिश्चितकालीन आंदोलन में बदलने का फैसला भी लिया जा सकता है।
फिलहाल, हड़ताल के बीच गुरुग्राम के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। अब देखना होगा कि सरकार और कर्मचारी यूनियनों के बीच बातचीत से कोई रास्ता निकलता है या बिजली संकट और गहराता है।




