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गुरुग्राम, 5 सितंबर। गुरुग्राम पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने अवैध गर्भपात किट की बिक्री के खिलाफ टिकरी गांव, सेक्टर 48, मेन रोड, यूरो इंटरनेशनल स्कूल के पास स्थित एम/एस इंडियन फार्मेसी पर छापेमारी के बाद दुकान के मैनेजर जावेद पुत्र गफूर और मालिक मोहम्मद आरिफ सहित अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) अधिनियम 2019, आवश्यक वस्तु अधिनियम (EC Act) 1955, और मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (MTP) अधिनियम 1971 के तहत FIR दर्ज की गई है। यह कार्रवाई अवैध गर्भपात और दवाओं की कालाबाजारी को रोकने के लिए की गई थी।
सिविल सर्जन, गुरुग्राम को मिली गुप्त सूचना के आधार पर एक विशेष टीम गठित की गई, जिसमें डॉ. प्रदीप कुमार (डिप्टी सिविल सर्जन व PC PNDT नोडल ऑफिसर), डॉ. जय प्रकाश (डिप्टी सिविल सर्जन व MTP नोडल ऑफिसर), डॉ. हरीश कुमार (मेडिकल ऑफिसर, PHC पालरा) और अमनदीप चौहान (ड्रग्स कंट्रोल ऑफिसर) शामिल थे। सूचना थी कि एम/एस इंडियन फार्मेसी MTP किट की अवैध बिक्री कर रही है, जो MTP अधिनियम 1971 का उल्लंघन है।
गुप्त सूचनादाता ने खुलासा किया कि फार्मेसी दावा करती है कि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने उन्हें MTP किट बेचने की अनुमति दी है, और वे ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स अधिनियम 1940 के तहत रिटेल सेल ड्रग्स लाइसेंस का दुरुपयोग कर रहे हैं।
टीम ने एक डिकॉय ग्राहक निशा पत्नी रिंकु को तैयार किया, जिनकी गर्भावस्था की पुष्टि अल्ट्रासाउंड से की गई थी। निशा ने दुकान पर जाकर 11 सप्ताह की गर्भावस्था का हवाला देते हुए गर्भपात के लिए दवा मांगी। दुकान पर मौजूद जावेद ने अल्ट्रासाउंड देखने के बाद 1500 रुपये में MTP किट (ब्रांड नाम: CLEAR KIT, बैच नंबर: MHT25025, एक्सपायरी: जनवरी 2027) दी और दवा की खुराक व समय की जानकारी दी। निशा ने 500 रुपये के तीन नोट (नंबर: 0UR421369, 5PP868532, 3MG558193), जो सिविल सर्जन द्वारा हस्ताक्षरित थे, के साथ भुगतान किया।
निशा ने दुकान से बाहर आकर पूरी घटना टीम को बताई। इसके बाद टीम ने दुकान पर छापा मारा और जावेद से पूछताछ की। जावेद ने खुद को दुकान का मैनेजर बताया और स्वीकार किया कि उसने MTP किट बेची। उसने यह भी बताया कि वह पंजीकृत फार्मासिस्ट नहीं है, और दुकान का पंजीकृत फार्मासिस्ट मोहम्मद आफताब है। दुकान से उसी नंबर के 1500 रुपये के नोट बरामद किए गए, जो डिकॉय ने दिए थे। MTP किट के लेबल पर स्पष्ट चेतावनी थी कि यह उत्पाद केवल MTP अधिनियम 2002 और MTP नियम 2003 के तहत पंजीकृत चिकित्सा सुविधा में और सेवा प्रदाता की देखरेख में उपयोग के लिए है। जावेद MTP किट की बिक्री या खरीद का कोई रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सका और बताया कि दुकान के मालिक मोहम्मद आरिफ को इस किट की खरीद के स्रोत की जानकारी है। इसके अलावा, किट की MRP को काले मार्कर से मिटाकर 1500 रुपये वसूले गए, जो ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) 2013 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3 और 7 का उल्लंघन है।
जावेद ने बिना योग्यता के चिकित्सा सेवाएं देने का दावा किया, जो भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम 1956 और MTP अधिनियम 1971 का उल्लंघन है। दुकान को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स अधिनियम 1940 की धारा 22(1)(d) के तहत सील कर दिया गया। दुकान के शटर पर एक ताले पर दो सील (निशान: DAAGGM) लगाई गईं, और चाबियां एक लिफाफे में सील करके जावेद को सौंप दी गईं।
घटनास्थल पर कई लोग एकत्र हुए, लेकिन कोई भी गवाह बनने के लिए सहमत नहीं हुआ और बिना नाम बताए चले गए। नकदी की बरामदगी और नोटों के नंबरों की जांच के दौरान वीडियोग्राफी की गई।
पुलिस को सौंपे गए दस्तावेजों में कार्यालय आदेश, स्पॉट मेमो, जब्ती मेमो, नकदी की प्रतियां, डिकॉय की गर्भावस्था की पुष्टि करने वाला मेडिकल प्रमाण, अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट और फिल्म, छापेमारी के लिए उपयोग किए गए नोटों की प्रति (सिविल सर्जन द्वारा हस्ताक्षरित), रिकवरी की वीडियो की पेन ड्राइव, और दो सील बंद लिफाफे शामिल हैं।
पुलिस ने जावेद पुत्र गफूर और अन्य के खिलाफ BNS 2023 की धारा 3(5), 88, 125, NMC अधिनियम 2019 की धारा 34, आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3 और 7, और MTP अधिनियम 1971 की धारा 3, 4, 5 के तहत मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई अवैध गर्भपात और दवाओं की कालाबाजारी पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
स्वास्थ्य विभाग और पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे ऐसी अवैध गतिविधियों की सूचना तुरंत दें, ताकि महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को खतरे में डालने वाली प्रथाओं को रोका जा सके। इस कार्रवाई ने अवैध गर्भपात के खिलाफ कड़ा संदेश दिया है, और भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर नकेल कसने की प्रतिबद्धता जताई है।




