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Reporter: Sonu Rana
Author: Sonu Rana
नई दिल्ली।
गर्मी बढ़ते ही राजधानी दिल्ली में पानी की किल्लत होने लगी है। कहीं पर पानी कम आ रहा है तो कहीं पर गंदा आ रहा है। दिल्ली के कई इलाकों में इस तरह की परेशानी सामने आने लगी है। यही समस्या अब रोहिणी सेक्टर 21 के लोगों के सामने आ गई है। रोहिणी सेक्टर 21 की पॉकेट 8 के लोगों के घरों में गंदा पानी पहुंच रहा है। यह इतना गंदा है कि गिलास में डालते हैं तो नाली के गंदे पानी की तरह काला दिखाई देता है। नहाते समय पता लगता है कि पानी से बदबू आ रही है।

वहीं इस पॉकेट की बात की जाए तो वर्ष 2019 से लगातार यहां के लोगों गंदा, कीचड़ वाला और सीवर मिला पानी पीने को मिल रहा है। सात साल से ज्यादा समय बीत गया, लेकिन दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) अब तक नई पाइपलाइन नहीं डाल पाया। अब बुजुर्गों और बच्चों की सेहत खराब होने लगी है। स्थानीय लोगों ने वर्ष 2019 से लेकर 2026 तक सीएम कार्यालय, डीजेबी सीईओ और अन्य अधिकारियों को बार-बार ईमेल, फोटो और शिकायतें भेजीं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। एेसे में पॉकेट के लोग मांग कर रहे हैं कि पुरानी पाइपलाइन को उखाड़कर नई पाइपलाइन डाली जाए। वहीं दिल्ली जल बोर्ड अधिकारियों ने कहा है कि मामला संज्ञान में है और जल्द ही जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
बुजुर्गों व बच्चों की सेहत खतरे में
पॉकेट 8 के लोगों ने कहा कि बुजुर्गों और बच्चों की सेहत अब खतरे में है। लगातार गंदा पानी पीने से परिवारों में बीमारियां बढ़ रही हैं। बच्चे ही देश का भविष्य हैं और अगर वही गंदा पानी पीकर बीमार हो जाएंगे तो यह देश का नुकसान है। यहां के लोगों की मांग है कि दिल्ली जल बोर्ड तुरंत पुरानी पाइपलाइनों को बदलकर नई पाइपलाइन डाले और रोजाना साफ पानी की सप्लाई शुरू करे।
यहां के लोगों से भेदभाव
लोगों का आरोप है कि सेक्टर 21 के दूसरे पॉकेट्स में रोज सुबह-शाम साफ पानी आता है, लेकिन पॉकेट-8 के साथ भेदभाव हो रहा है। पानी की कमी के नाम पर उन्हें सिर्फ अल्टरनेट डेज में थोड़ा-सा गंदा पानी दिया जा रहा है।
लोगों का क्या है कहना
-पॉकेट 8 के रहने वाले विकास कपूर ने बताया कि वह पेशे से वकील हैं और आरडब्ल्यूए सेक्रेटरी भी हैं। वह यहां पर परिवार के साथ रहते हैं। वह बताते हैं कि यहां हर 48 घंटे में सिर्फ 3 घंटे (सुबह 7 से 10 बजे तक) पानी आता है। वह पानी भी इतना गंदा होता है कि देखकर घिन आती है। कभी काला, कभी कीचड़ भरा, कभी सीवर की तेज बदबू वाला। अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए।
-पॉकेट आठ के ही विकास गोयल का कहना है कि वर्ष 2000 के आसपास बिछाई गई पुरानी पाइपलाइनें अब पूरी तरह खराब हो चुकी हैं। सीवर का पानी पेयजल लाइन में मिल रहा है, जिससे लगातार गंदा पानी आ रहा है। बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है। इसलिए समस्या का समाधान किया जाना चाहिए।




