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Reporter: Pardeep Narula
Author: Pardeep Narula
गुरुग्राम में ‘पीस डॉग’ आलोका से मिलने उमड़ी भीड़, हजारों लोगों ने ली तस्वीरें
गुरुग्राम में मंगलवार को एक अनोखा नज़ारा देखने को मिला, जब ‘पीस डॉग’ आलोका से मिलने के लिए बड़ी संख्या में पशु प्रेमी एकत्र हुए। शहर के एक होटल में आयोजित विशेष कार्यक्रम में लोगों ने आलोका के साथ तस्वीरें खिंचवाईं, वहीं कई लोग उसके प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए भावुक नजर आए।

यह कार्यक्रम गुरुग्राम के The Westin Gurgaon में आयोजित किया गया, जहां शाम करीब चार बजे से लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। आयोजनकर्ता दिव्यम खेरा के अनुसार, आलोका की यात्रा भारत से शुरू हुई थी और अब उसे दोबारा लोगों से जोड़ने के उद्देश्य से देश लाया गया है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी से भी हुई मुलाकात: भारत पहुंचने के बाद आलोका ने दो दिन पहले दिल्ली में पूर्व केंद्रीय मंत्री Maneka Gandhi और बौद्ध भिक्षुओं से मुलाकात की। इससे पहले वह अमेरिका, श्रीलंका और थाईलैंड समेत कई देशों में शांति यात्राओं का हिस्सा रह चुका है।
कोलकाता की गलियों से वैश्विक शांति यात्रा तक: बौद्ध भिक्षु पन्नकारा के मुताबिक, आलोका की कहानी वर्ष 2022 में शुरू हुई, जब कोलकाता में एक शांति यात्रा के दौरान यह भारतीय नस्ल का एक बेसहारा कुत्ता भिक्षुओं के साथ चलने लगा। धीरे-धीरे वह यात्रा का स्थायी हिस्सा बन गया।
करीब 100 दिनों तक गांवों और जंगलों से गुजरने वाली इस यात्रा के दौरान एक सड़क हादसे में आलोका घायल भी हुआ, लेकिन स्वस्थ होने के बाद उसने फिर से यात्रा में हिस्सा लिया।
उसकी निष्ठा और शांत स्वभाव से प्रभावित होकर भिक्षुओं ने उसे गोद ले लिया और पालि भाषा में उसका नाम ‘आलोका’ रखा। इस शब्द का अर्थ ‘प्रकाश’ या ‘रोशनी’ होता है।
अमेरिका में 3,700 किलोमीटर की पदयात्रा: भिक्षु पन्नकारा के अनुसार, अक्टूबर 2025 में टेक्सास से शुरू हुई वैश्विक शांति यात्रा के दौरान आलोका ने अमेरिका के 10 राज्यों से गुजरते हुए लगभग 3,700 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी की।
सोशल मीडिया पर भी लोकप्रिय: करीब चार साल का आलोका भारतीय परिया नस्ल का कुत्ता है। उसके माथे पर दिल के आकार का एक प्राकृतिक निशान है, जिसे उसके प्रशंसक उसकी पहचान मानते हैं। इंस्टाग्राम पर उसके 4.8 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं।
आयोजकों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य बेसहारा जानवरों के प्रति समाज में संवेदनशीलता और दयाभाव को बढ़ावा देना है। उनका मानना है कि शांति की शुरुआत इंसानों के दिलों से होती है और आलोका उसी संदेश का प्रतीक बन चुका है।




