Bilkul Sateek News
Reporter: Sonu Rana
Author: Sonu Rana
गुड़गांव/नई दिल्ली।
पुलिस चाहे दिल्ली की हो या गुड़गांव की… उसे साल में सिर्फ दो बार पुलिस वैरिफिकेशन याद आती है। एक बार तो 26 जनवरी से पहले और एक बार 15 अगस्त से पहले। अब जब 26 जनवरी और 15 अगस्त के बीच का समय चल रहा है तो इस समय पुलिस वैरिफिकेशन न के नाम पर कर रही है व कुंभकर्णी नींद सो रही है। हालांकि इसमें लापरवाही पुलिस के साथ-साथ मकान मालिक भी बरतते हैं। इसी का फायदा उठाकर दिल्ली एनसीआर में नौकर वारदात को अंजाम देते हैं और फिर आसानी से भाग जाते हैं।

राजधानी दिल्ली की बात की जाए तो बीते दिनों नौकरों द्वारा की गई दो बड़ी वारदात ने लोगों में दहशत फैला दी है। लुटियंस दिल्ली के गोल्फ लिंक्स इलाके में शराब कारोबारी प्रवीण चावला के घर में उनके नौकर सुशील कामत ने साथियों के साथ मिलकर पूरे परिवार को बंधक बनाकर 30 लाख रुपये के जेवर और नकदी लूट ली। वहीं दूसरी ओर अमर कालोनी में आईआरएस अधिकारी की बेटी के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई। इसमें भी घर में पहले काम करने वाला नौकर राहुल मीणा मुख्य आरोपी है। इन घटनाओं में न तो मालिकों ने नौकर का पुलिस वैरिफिकेशन कराया और न ही पुलिस ने सख्ती दिखाई। इसी वजह से अपराधी बेखौफ होकर वारदात को अंजाम दे रहे हैं। यही हाल गुड़गांव का है। यहां पर नौकर वारदात को अंजाम देने के लिए फर्जी दस्तावेज की मदद से घरों में एंट्री लेते हैं। बाद में लूटपाट या हत्या कर भाग जाते हैं। दिल्ली पुलिस के पास नौकरों का डेटा तो है, वहीं अगर गुड़गांव पुलिस की बात की जाए तो उन्हें पता ही नहीं है कि कितने लोगों का पुलिस सत्यापन हुआ है और कितनों का नहीं।
पांच वर्ष में नौकरों के खिलाफ 750 केस दर्ज
पुलिस की माने तो 2020 से 2025 तक दिल्ली में घरेलू नौकरों द्वारा लूट व चोरी के 750 से ज्यादा मामले दर्ज हुए, जिनमें करीब 650 आरोपी पकड़े गए। ज्यादातर मामलों में पुलिस वैरिफिकेशन नहीं करवाई गई थी। कानून कहता है कि घरेलू नौकर, किरायेदार और कार चालक का पुलिस सत्यापन जरूरी है। अगर मकान मालिक इसे नजरअंदाज करता है तो उसके खिलाफ केस दर्ज हो सकता है, जिसमें जेल और जुर्माना दोनों का प्रावधान है।
वैरिफिकेशन से होती है परिवार की सुरक्षा
लोग कानूनी झंझट से बचना चाहते हैं। इसका फायदा उठाकर कई बार नौकर अपना असली नाम, गांव या पता छिपा लेता है। जब पुलिस जांच करती है तो पता चलता है कि जो पता बताया गया, वह कहीं है ही नहीं। ऐसे में अपराधी आसानी से घर में घुसकर लूटपाट या बदतर वारदात कर भाग जाते हैं। पुलिस का कहना है कि नौकर रखने से पहले उसकी पुलिस क्लीयरेंस रिपोर्ट जरूर लें। अगर वह स्थायी पता, फोटो या पुराने मालिक का विवरण देने से मना करे तो उसे रखना खतरे की घंटी है। वैरिफिकेशन सिर्फ कागजी कार्य नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सुरक्षा का मामला है।
इस तरह करवाएं वैरिफिकेशन
हर थाने में वैरिफिकेशन के फॉर्म उपलब्ध हैं। मकान मालिक को नौकर का फोटो, आधार नंबर, स्थायी पता और पिछले मालिक का ब्यौरा भरकर थाने में जमा करना होता है। दिल्ली पुलिस का ऐप डाउनलोड करके घर बैठे ऑनलाइन भी आवेदन किया जा सकता है। बीट कांस्टेबल भी घर आकर फॉर्म भरने में मदद कर सकता है।
पिछले कुछ सालों में हुई कुछ बड़ी वारदात
-20 अप्रैल 2026: गोल्फ लिंक्स कालोनी में शराब कारोबारी के घर में नौकर सुशील उर्फ गुड्डू कुमार कामत और उसके 7 साथियों ने परिवार को बंधक बनाकर 30 लाख लूट लिए।
-जुलाई 2025: लाजपत नगर में नौकर ने मालकिन और उनके 14 साल के बेटे की गला रेतकर हत्या कर दी।
-मई 2024: ग्रेटर कैलाश में डॉक्टर की उनके नौकर और साथियों ने लूट के लिए हत्या कर दी।
-जुलाई 2021: वसंत विहार में पूर्व मंत्री की पत्नी और वकील की धोबी और उसके साथियों ने लूट के लिए गला घोंटकर हत्या कर दी।
2020 से लेकर 2024 तक वर्षवार आंकड़े
2020: 106 मामले, 74 गिरफ्तारियां
2021: 154 मामले, 157 गिरफ्तारियां
2022: 164 मामले, 151 गिरफ्तारियां
2023: 119 मामले, 88 गिरफ्तारियां
2024: 106 मामले, 94 गिरफ्तारियां




