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Reporter: Pardeep Narula
Author: Pardeep Narula
प्रदूषण और भारी वाहनों से सड़कों को होने वाले नुकसान को रोकने की तैयारी, जमीन तलाशने के लिए एडीसी की अध्यक्षता में बनी कमेटी
गुरुग्राम, 5 नवंबर। गुरुग्राम में जगह-जगह चल रहे रेडी मिक्स कंक्रीट (RMC) प्लांटों को लेकर अब प्रशासन ने नई योजना तैयार की है। शहर में अनियंत्रित तरीके से चल रहे इन प्लांटों से होने वाले धूल और वायु प्रदूषण के साथ-साथ भारी वाहनों की आवाजाही से सड़कों को पहुंचने वाले नुकसान को कम करने के लिए अब इन्हें शहर से बाहर तय जगहों पर शिफ्ट करने की तैयारी है। इसके लिए शहर से बाहर अलग-अलग स्थानों पर विशेष RMC जोन विकसित किए जाएंगे।

इन जोन में ही RMC प्लांटों को स्थापित करने और उनके संचालन की व्यवस्था की जाएगी। प्रशासन ने इसके लिए सरकारी जमीन की तलाश भी शुरू कर दी है। खास बात यह है कि जरूरत के हिसाब से एक से ज्यादा स्थानों पर RMC जोन बनाए जा सकते हैं, ताकि शहर में चल रहे प्लांटों को व्यवस्थित तरीके से इन जगहों पर जगह दी जा सके।
इस मुद्दे पर बुधवार को लघु सचिवालय में हरियाणा सरकार के शहरी विकास के प्रधान सलाहकार डीएस ढेसी की अध्यक्षता में हुई 14वीं जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक में विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीसी मीणा ने बताया कि RMC प्लांटों के लिए उपयुक्त जमीन तलाशने के मकसद से गुरुग्राम के अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है।
इस कमेटी में GMDA के DTP एनफोर्समेंट आरएस बाठ को सदस्य सचिव बनाया गया है। वहीं, जिला प्रशासन, नगर निगम गुरुग्राम (MCG), नगर निगम मानेसर (MCM) और हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं आधारभूत संरचना विकास निगम (HSIIDC) के प्रतिनिधियों को भी इसमें शामिल किया गया है। कमेटी का मुख्य काम ऐसे स्थानों की पहचान करना है, जहां RMC प्लांटों के लिए अलग जोन विकसित किए जा सकें।
बैठक में डीएस ढेसी ने कहा कि शहर से बाहर अलग-अलग जगहों पर RMC जोन बनाने का मुद्दा इसी महीने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी उठाया गया था। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जमीन की पहचान और आगे की प्रक्रिया में देरी न की जाए। कमेटी तय समय में संभावित जगहों की जानकारी जुटाकर अपनी सिफारिशें दे।
HSIIDC और पंचायतों की जमीन पर भी नजर: RMC जोन बनाने के लिए सबसे पहले नगर निगमों की सीमा से बाहर उपलब्ध सरकारी जमीन की तलाश की जाएगी। इसके लिए HSIIDC के पास मौजूद जमीन के अलावा पंचायतों की जमीन पर भी संभावनाएं देखी जाएंगी। प्रशासन का प्रयास है कि ऐसी जगहों का चयन किया जाए, जहां प्लांटों का संचालन शहर की आबादी और रिहायशी इलाकों को प्रभावित किए बिना किया जा सके।
अधिकारियों के सामने यह भी विकल्प रखा गया है कि सभी RMC प्लांटों के लिए एक ही जगह पर निर्भर रहने के बजाय जरूरत के अनुसार अलग-अलग इलाकों में कई जोन बनाए जाएं। इससे प्लांटों को व्यवस्थित करने के साथ-साथ उनके संचालन को भी बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा।
शहर की सड़कों और हवा दोनों को मिलेगी राहत: गुरुग्राम में निर्माण कार्यों के चलते RMC प्लांटों की भूमिका काफी अहम है, लेकिन इनके संचालन और इनसे जुड़े भारी वाहनों की आवाजाही के कारण कई तरह की परेशानियां भी सामने आती हैं। भारी ट्रकों और मिक्सर वाहनों की आवाजाही से सड़कों पर दबाव बढ़ता है, वहीं प्लांटों से निकलने वाली धूल भी आसपास के वातावरण को प्रभावित करती है।
अगर प्रशासन की यह योजना जमीन पर उतरती है तो शहर के अंदर भारी वाहनों की आवाजाही कम हो सकती है। इससे सड़कों को होने वाले नुकसान में कमी आने की उम्मीद है। साथ ही, RMC प्लांटों से निकलने वाली धूल और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता RMC प्लांटों के लिए उपयुक्त जमीन तलाशना और अलग-अलग जोन विकसित करने की संभावनाओं पर काम करना है। अब देखना होगा कि कमेटी कितनी जल्दी अपनी रिपोर्ट सौंपती है और गुरुग्राम में RMC प्लांटों को व्यवस्थित करने की यह योजना कब तक जमीन पर उतर पाती है।




