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Reporter: Sonu Rana
Author: Sonu Rana
गुड़गांव।
गुड़गांव में गुरुवार सुबह पूर्व एनएसजी कमांडो की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वह सरपंच की हत्या के मामले में जेल में बंद था और बेटी की शादी के लिए पैरोल पर जेल से बाहर आया था। मृतक की पहचान कासन गांव के सुंदर सिंह के रूप में हुई है। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवा दिया है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी कैमरों की मदद से आरोपी को पकड़ने की कोशिश कर रही है।

जानकारी के अनुसार, गुड़गांव में सुबह के समय सुंदर सिंह कासन गांव की एक जूतों की दुकान के बाहर बैठकर दुकानदार व आसपास के लोगों से बातचीत कर रहा था। इस दौरान दो लड़के आए और सुंदर पर ताबड़तोड़ गोली चलानी शुरू कर दी। गोलियां लगते ही वह जमीन पर गिर गए और जब आरोपियों को पक्का हो गया कि सुंदर मर गया है तौ आरोपी फरार हो गए। घायल को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवा दिया है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल आरोपियों का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
कासन गांव के सरपंच की हत्या में था आरोपी
बताया जा रहा है कि कासन गांव के तत्कालीक सरपंच के बेटे ने अपने दोस्त के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। यह हत्या वर्ष 2018 में हुई पिता की हत्या का बदला लेने के लिए की गई। वर्ष 2018 में कासन गांव के सरपंच बहादुर की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में आरोपी सुंदर सिंह को जेल हुई थी। कुछ दिन पहले वह पैरोल पर जेल से बाहर आया था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पिता की मौत का बदला लेने के लिए बहादुर के बैटे ने अपने दोस्त के साथ मिलकर आरोपी को बाजार में ही गोली मार दी। इसके बाद आरोपी हथियार लहराते हुए फरार हो गए। हालांकि इस बारे में आधिकारिक रूप से पुलिस की ओर से कोई बयान नहीं आया है।
30 वर्ष पुराने दोस्त थे
सुंदर सिंह और सरपंच बहादुर 30 वर्ष पुराने दोस्त थे। दोनों पहले फौज में नौकरी करते थे। इस दौरान दोनों की दोस्ती हुई। फौज में रहते हुए उसने एनएसजी के लिए अप्लाई किया और वह एनएसजी कमांडो भी बन गया। रिटायरमेंट के बाद दोनों गांव में अधिकतर समय साथ ही बिताते थे।
35 लाख रुपये के लिए की थी हत्या
गौरतलब है कि सरपंच बहादुर सिंह ब्याज बट्टे का काम भी करते थे। वह सस्ती दर पर पैसे लेकर ऊंची दर पर आगे लोगों को देते थे। इस दौरान सुंदर के पास भी पैसे पड़े थे। सुंदर सिंह ने भी अपने 35 लाख बहादुर सिंह को दिए थे ताकी वह उन पैसों को आगे ब्याज पर चढ़ा दे। बाद में इन पैसों को लेकर दोनों दोस्तों में पैसों को लेकर तकरार होने लगी। मूल की बात तो दूर ब्याज मिलना भी बंद हो गया। गांव के लोगों की मानें तो कई महीनों तक सुंदर अपने पैसे मांगता रहा, लेकिन बहादुर ने नहीं दिए। सरपंच हर बार रुपये न होने की बात कह देते थे। इसी को लेकर सरपंच की हत्या की गई थी।
साथ बैठकर पी थी शराब
गांव के लोगों की माने तो बहादुर की हत्या से पहले सुंदर ने बहादुर के साथ बैठकर शराब पी थी। शराब पीते समय सुंदर ने बहादुर से पैसे मांगे, लेकिन बहादुर ने पैसे नहीं दिए। इस दौरान सुंदर ने रुपये न देने पर गोली मारने की धमकी दे दी थी। लेकिन 35 लाख रुपयों के लेनदेन का विवाद ऐसा बढ़ा कि उनकी दोस्ती खत्म हो गई। इसके बाद उसे गोली मारकर सुंदर थाने पहुंच गया था।
20 अप्रैल को थी बेटी की शादी
गांव के लोगों की माने तो 20 अप्रैल को उनकी बेटी की शादी थी। उसी में शामिल होने के लिए सुंदर जेल से पैरोल पर बाहर आया था। शादी के बाद कुछ मेहमान घर पर ही रह गए थे। वह भी कुछ दिन पहले ही घर से गए है। उन्हें नहीं पता था कि जेल वापस जाने से पहले इस तरह बीच बाजार हत्या कर दी जाएगी।




