Bilkul Sateek News
Reporter: Sonu Rana
Author: Sonu Rana
नई दिल्ली।
रोहिणी के बुध विहार थाना इलाके के मांगेराम पार्क इलाके में मंगलवार रात लगी आग में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की जिंदा जलने से मौत हो गई। मृतकों में पिता, मां और मात्र दो वर्षीय बच्ची शामिल हैं। उनकी पहचान मुसकबिर, पत्नी मुरार और दो वर्षीय बेटी मोइमाना के रूप में हुई है। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवा दिए हैं। आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। हालांकि कुछ लोगों का आरोप है कि यह आग जानबूझकर लगाई गई है। पुलिस मामले में जांच कर रही है।

जानकारी के अनुसार, घटना मंगलवार रात करीब एक बजे हुई। मांगेराम पार्क में एक प्लाट के अंदर बनी झुग्गी बस्ती में अचानक आग लग गई। यहां पर आसपास कबाड़ पड़ा होने की वजह से आग तेजी से फैली और ज्वलनशील कबाड़ की वजह से बेकाबू हो गई। जब तक परिवार के लोग कुछ समझ पाते, तब तक तीनों ओर से घिर चुके थे। कुछ ही देर में आग ने तीनों को लील लिया।
दमकल विभाग की छह गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। जब मलबा हटाया गया तो तीन शव बरामद किए गए।
बताया जा रहा है कि परिवार कबाड़ी का काम करता था और प्लॉट के अंदर बनी झुग्गियों में रहता था। उनके पास की झुग्गियों में भी लोग रहते थे। अन्य झुग्गियों में रहने वाले लोग समय रहते बाहर निकल गए।
दमकल अधिकारी ने बताया कि आग लगने का मुख्य कारण शॉर्ट सर्किट हो सकता है। हालांकि पुलिस मामले की जांच कर रही है। कुछ स्थानीय लोगों ने आग लगाने की आशंका भी जताई है, जिसकी भी जांच की जा रही है।
झुग्गी बस्तियों की पुरानी समस्या
रोहिणी की यह घटना दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ियों में आग लगने की बढ़ती घटनाओं को फिर उजागर करती है। तंग जगहों, अवैध बिजली कनेक्शन, ज्वलनशील सामान और अग्निशमन उपकरणों की कमी की वजह से एेसी घटनाएं सामने आती हैं। हर हादसे के बाद मुआवजे और जांच की बातें होती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार नहीं हो पाता। संकरी गलियों में फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है।
गर्मी में बढ़ेंगी आगजनी की घटनाएं
दिल्ली में हर वर्ष गर्मियों में आग लगने की वजह से दर्जनों लोगों की मौत होती है। बावजूद इसके कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते। बवाना जेजे कॉलोनी हो, शाहबाद डेरी हो या फिर और कोई झुग्गी झोपड़ी वाला इलाका। यहां पर आग लगने से मौत होती ही है। इनको बचाने के लिए कोई प्रयास जमीनी स्तर पर नहीं दिखाई देते।
