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Reporter: Pardeep Narula
Author: Pardeep Narula
देश में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अक्सर दो तरह की तस्वीरें देखने को मिलती हैं। एक तरफ पेपर लीक, अव्यवस्था और अभ्यर्थियों के प्रदर्शन की खबरें आती हैं, तो दूसरी तरफ कुछ ऐसे प्रयास भी नजर आते हैं जिनका मकसद परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित, आसान और भरोसेमंद बनाना होता है।

हाल ही में हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) की भर्ती परीक्षा के दौरान राज्य सरकार ने अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए कई खास इंतजाम किए। दूर-दराज़ से आने वाले उम्मीदवारों के लिए परिवहन की व्यवस्था की गई। कई जगहों पर हरियाणा पुलिस ने भी जरूरतमंद अभ्यर्थियों को अपनी गाड़ियों से परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया, ताकि कोई भी छात्र सिर्फ सफर की परेशानी की वजह से परीक्षा देने से वंचित न रह जाए।
इसके अलावा परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा, निगरानी और पारदर्शिता के पुख्ता इंतजाम किए गए, जिससे पूरी परीक्षा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।
इस दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी खुद कई परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे। उन्होंने अभ्यर्थियों से बातचीत की, उनकी समस्याएं पूछीं और यह जानने की कोशिश की कि कहीं उन्हें किसी तरह की दिक्कत तो नहीं है। इस कदम ने यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार के लिए परीक्षा सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा अहम विषय है।
पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा में भर्ती परीक्षाओं को ज्यादा पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। मेरिट आधारित चयन और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया पर लगातार जोर दिया गया है। यही वजह है कि कई लोग मानते हैं कि राज्य में पारदर्शी भर्ती व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हालिया परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों के लिए की गई व्यवस्थाओं ने इस भरोसे को और मजबूत करने की कोशिश की है।
दूसरी ओर, हाल के वर्षों में दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों के प्रदर्शन भी देखने को मिले हैं। युवाओं की मांग हमेशा यही रही है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और समय पर पूरी हो। लोकतंत्र में अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन जहां सरकारें सकारात्मक और प्रभावी कदम उठाती हैं, वहां उन प्रयासों को भी निष्पक्ष नजरिए से देखा जाना चाहिए।
साथ ही यह भी उतना ही जरूरी है कि किसी भी परीक्षा में अगर पेपर लीक, धांधली या किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो उसके खिलाफ बिना किसी ढिलाई के सख्त कार्रवाई हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई बार कह चुके हैं कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। हाल के वर्षों में NEET परीक्षा से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई, दोषियों पर शिकंजा और जहां जरूरत पड़ी वहां दोबारा परीक्षा कराने जैसे कदम भी इसी दिशा में उठाए गए।
आखिर में सवाल यही है कि क्या सरकार की जिम्मेदारी सिर्फ परीक्षा आयोजित करना है, या फिर अभ्यर्थियों की सुविधा, सुरक्षा और भरोसे को भी उतनी ही प्राथमिकता देना है? किसी भी सरकार की असली पहचान इसी बात से बनती है कि वह परीक्षा प्रक्रिया को कितना निष्पक्ष, पारदर्शी और अभ्यर्थी-केंद्रित बनाती है। हरियाणा में हालिया भर्ती परीक्षा के दौरान दिखाई गई व्यवस्थाएं इसी सोच की एक झलक पेश करती हैं। साथ ही यह भी जरूरी है कि भविष्य में देश के किसी भी राज्य में अगर परीक्षा से जुड़ी कोई गड़बड़ी सामने आए तो उस पर बिना किसी समझौते के सख्त कार्रवाई हो, क्योंकि युवाओं का भरोसा ही किसी भी परीक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है।




