Bilkul Sateek News
Reporter: Pardeep Narula
Author: Pardeep Narula
गुरुग्राम में प्रदूषण के बीच फेफड़ों की जांच के लिए मुफ्त कैंप, सैकड़ों लोगों ने लिया लाभ
गुरुग्राम: शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण और बदलते मौसम के बीच सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में लोगों को फेफड़ों की सेहत के प्रति जागरूक करने और समय पर जांच की सुविधा देने के लिए सिल्वर स्ट्रीक मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल ने सेक्टर-87 स्थित अपने परिसर में मुफ्त श्वसन जांच शिविर लगाया। शिविर में गुरुग्राम के अलग-अलग इलाकों से सैकड़ों लोग पहुंचे और विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श लेने के साथ फेफड़ों की जांच कराई।
शिविर का उद्देश्य लोगों को सांस से जुड़ी समस्याओं के शुरुआती लक्षणों के प्रति जागरूक करना और उन्हें समय रहते डॉक्टर से सलाह लेने के लिए प्रोत्साहित करना था। अस्पताल की ओर से लोगों को बिना किसी शुल्क के रजिस्ट्रेशन, पल्मोनोलॉजिस्ट से परामर्श और फेफड़ों की कार्यक्षमता जांचने के लिए पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (PFT) की सुविधा दी गई।
गुरुग्राम में प्रदूषण का स्तर चिंता का विषय: गुरुग्राम में वायु प्रदूषण का स्तर लंबे समय से स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अनुसार, वर्ष 2021 से 2024 के बीच शहर में PM2.5 का वार्षिक औसत स्तर 88 से 104 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के बीच रहा। यह राष्ट्रीय वार्षिक मानक 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से काफी अधिक है। इसी अवधि में गुरुग्राम का वार्षिक औसत AQI 189 से 217 के बीच दर्ज किया गया।
प्रदूषण के साथ मौसम में बदलाव भी सांस संबंधी परेशानियों को बढ़ा सकता है। खासकर बुजुर्गों, अस्थमा और सीओपीडी जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अस्पताल ने लोगों को जांच और विशेषज्ञ सलाह उपलब्ध कराने के लिए यह पहल की।
खांसी और सांस फूलने जैसे लक्षणों को न करें नजरअंदाज: शिविर के दौरान लोगों को लगातार खांसी, सांस फूलने और सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आने यानी घरघराहट जैसे लक्षणों के बारे में जानकारी दी गई। डॉक्टरों ने बताया कि इन लक्षणों को केवल मौसम में बदलाव का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच कराने से समस्या की पहचान और सही उपचार शुरू करने में मदद मिल सकती है।
शिविर में सिल्वर स्ट्रीक मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल के कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. आयुष पांडे (MBBS, MD – Respiratory Medicine) ने मरीजों की जांच की और उन्हें जरूरी चिकित्सकीय सलाह दी। इसके साथ ही वरिष्ठ नागरिकों के लिए श्वसन स्वास्थ्य पर विशेष जागरूकता सत्र भी आयोजित किया गया।
इस सत्र में बदलते मौसम, बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरण में मौजूद प्रदूषकों का फेफड़ों पर पड़ने वाले असर के बारे में बताया गया। लोगों को सांस संबंधी बीमारियों के शुरुआती संकेत पहचानने और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी भी दी गई।
समय पर जांच से मिल सकती है सही उपचार की दिशा: डॉ. आयुष पांडे ने कहा कि मौसम में बदलाव और बढ़ता प्रदूषण सांस की सेहत पर गंभीर असर डाल सकते हैं। इसका खतरा खासतौर पर बुजुर्गों और अस्थमा या सीओपीडी जैसी बीमारियों से पहले से जूझ रहे लोगों में अधिक रहता है।
उन्होंने कहा कि लगातार खांसी, सांस फूलना या सांस लेते समय घरघराहट जैसे लक्षणों को सामान्य मौसमी परेशानी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर डॉक्टर से परामर्श और फेफड़ों की कार्यक्षमता की जांच से समस्या को समझने और सही उपचार की दिशा तय करने में मदद मिलती है। फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए जागरूकता और समय पर जांच बेहद जरूरी है।
इलाज के साथ बचाव पर भी ध्यान: इस शिविर के जरिए सैकड़ों लोगों को मुफ्त विशेषज्ञ परामर्श और फेफड़ों की जांच कराने का अवसर मिला। अस्पताल की यह पहल लोगों को सांस संबंधी बीमारियों के प्रति जागरूक करने और शुरुआती लक्षणों को पहचानने पर केंद्रित रही।
अस्पताल का उद्देश्य लोगों को प्रदूषण और बदलते मौसम के बीच अपने फेफड़ों की सेहत का ध्यान रखने, लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह लेने और जरूरत के अनुसार नियमित जांच कराने के लिए प्रोत्साहित करना है।





