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गुरुग्राम, 29 अगस्त। हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने आज गुरुग्राम में एक उच्च-स्तरीय बैठक की, जिसमें शहर के समग्र विकास और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा की गई। पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में आयोजित इस बैठक में गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए), हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी), नगर निगम गुरुग्राम एवं मानेसर, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित सभी संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि गुरुग्राम में चल रही सभी विकास परियोजनाओं को न केवल वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाए, बल्कि उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में भी सक्षम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम देश की आर्थिक प्रगति में एक अहम कड़ी है। ऐसे में यहां की विकास योजनाएं आने वाले कम से कम 20 वर्षों की जनसंख्या वृद्धि और शहरी विस्तार को ध्यान में रखकर तैयार की जानी चाहिए। किसी भी परियोजना को तब तक धरातल पर न उतारा जाए, जब तक वह भविष्य की जरूरतों पर पूरी तरह खरी न उतरे।
राव नरबीर सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में दिल्ली सरकार यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। ऐसे में गुरुग्राम की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि यमुना से जुड़ी सभी लेगों में केवल एसटीपी (शोधन संयंत्र) का शोधित जल ही छोड़ा जाए। उन्होंने नगर निगम गुरुग्राम तथा जीएमडीए को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में स्थापित सभी एसटीपी का सुचारू संचालन सुनिश्चित करें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में यदि नए एसटीपी की योजना बनाई जाए तो उन्हें संबंधित लेग की एंड टेल पर ही स्थापित किया जाए, ताकि जल प्रदूषण की समस्या को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके।
राव नरबीर सिंह ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि एनवायरमेंट क्लियरेंस (ईसी) की प्रक्रिया में परियोजनाओं से प्राप्त होने वाली कॉरपोरेट एनवायरनमेंटल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीईआर) राशि को किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही के बिना, निर्धारित मानकों एवं दिशा-निर्देशों के अनुसार ही खर्च किया जाए। उन्होंने कहा कि यह धनराशि सीधे तौर पर शहर के विकास, पर्यावरण संरक्षण और जनहित से जुड़े कार्यों जैसे– जल संरक्षण, वृक्षारोपण, प्रदूषण नियंत्रण, स्वास्थ्य व शिक्षा संबंधी सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने पर प्राथमिकता से लगाई जानी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड न केवल सीईआर फंड के उपयोग पर कड़ी निगरानी रखे, बल्कि यह भी सुनिश्चित करे कि विभाग से संबंधित संस्थानों द्वारा उपलब्ध कराया जाने वाला कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड भी पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ उपयोग में लाया जा रहा है। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस संबंध में समय-समय पर समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएं और यदि कहीं भी फंड का दुरुपयोग या लापरवाही पाई जाती है तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।
राव नरबीर सिंह ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि शहर में बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण, यातायात प्रबंधन और स्मार्ट सिटी के अनुरूप शहरी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने के लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय और पारदर्शिता के साथ कार्य करना होगा।
बैठक में गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्यामल मिश्रा, नगर निगम गुरुग्राम के आयुक्त प्रदीप दहिया, मानेसर निगमायुक्त आयुष सिन्हा, एचएसवीपी प्रशासक वैशाली सिंह, अतिरिक्त निगमायुक्त यश जालुका व रविन्द्र यादव सहित जीएमडीए, नगर निगम, एचएसवीपी और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी मौजूद रहे।